आरोपियों और राजनीतिक विरोधियों पर अंडा फेंकने के मामलों में दर्ज हो एफआईआर: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया है कि राज्य में आरोपियों या राजनीतिक विरोधियों पर अंडा फेंकने की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाए और ऐसे मामलों में पुलिस तुरंत एफआईआर दर्ज करे। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश तपोब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी चटर्जी की खंडपीठ ने मंगलवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

अदालत ने कहा कि पुलिस हिरासत में मौजूद व्यक्ति की सुरक्षा करना सीधे तौर पर राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। सुनवाई के दौरान पीठ ने टिप्पणी की कि आरोपी होने मात्र से किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकार खत्म नहीं हो जाते। हाईकोर्ट ने बंगाल सरकार से इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस दिशानिर्देश तैयार करने को कहा है।

राज्य का कर्तव्य और मौलिक अधिकार

खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से स्पष्ट किया कि जब राज्य अपनी पुलिस के जरिए किसी व्यक्ति को हिरासत में लेता है, तो उस व्यक्ति की रक्षा करना पूरी तरह से राज्य का दायित्व बन जाता है। अदालत ने आगे कहा कि केवल कुछ लोगों को गिरफ्तार कर लेने से इस समस्या का स्थाई समाधान नहीं होगा, बल्कि इसके लिए समाज में व्यापक जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है।

याचिकाकर्ता और सरकार के तर्क

READ ALSO  न्याय में सुधार की झलक होनी चाहिए, बदला लेने की नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाल बलात्कार मामले में आजीवन कारावास की सजा घटाकर 14 वर्ष कर दी

यह आदेश राज्य में विभिन्न स्थानों पर राजनीतिक विरोध के नाम पर आरोपियों पर अंडा फेंके जाने की प्रथा को रोकने के लिए दायर एक जनहित याचिका पर आया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने अदालत में आरोप लगाया कि राज्य सरकार ऐसी घटनाओं को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस जानबूझकर आरोपियों का अलग-अलग इलाकों में जुलूस निकालती है, जिससे वे भीड़ का निशाना बनते हैं।

वहीं, राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि सरकार कानून हाथ में लेने वालों का कतई समर्थन नहीं करती है। उन्होंने बताया कि जबरन वसूली और अन्य अपराधों के आरोपियों पर अंडा फेंकने के आरोप में पुलिस ने कुछ लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया है।

READ ALSO  चंडीगढ़ प्रशासन ने  हाईकोर्ट के ग्रीन बेल्ट पेवर ब्लॉक्स आदेश पर सुप्रीम कोर्ट में अपील करने पर विचार किया

दिशानिर्देश और रिपोर्ट सौंपने की समय-सीमा

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 जुलाई की तारीख तय की है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस तारीख तक एक विस्तृत हलफनामा दायर करे। इस हलफनामे में सरकार को यह बताना होगा कि अंडा फेंकने की घटनाओं को रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और पुलिस ने इस संबंध में कुल कितनी एफआईआर दर्ज की हैं।

READ ALSO  एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 के तहत जमानत आवेदन तय करते समय कोर्ट को यह निष्कर्ष देने की आवश्यकता नहीं है कि आरोपी व्यक्ति दोषी नहीं है: सुप्रीम कोर्ट
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles