पांच नए जजों के शपथ ग्रहण के साथ पूर्ण क्षमता के बेहद करीब पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

देश की सर्वोच्च अदालत की कार्यक्षमता बढ़ाने और लंबित मामलों के भारी बोझ को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, सुप्रीम कोर्ट के पांच नव-नियुक्त जजों ने मंगलवार (2 जून, 2026) को पद की शपथ ली।

भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक भवन परिसर स्थित सभागार (ऑडिटोरियम) में सुबह 10:30 बजे आयोजित एक औपचारिक समारोह में नवनियुक्त जजों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

इन महत्वपूर्ण नियुक्तियों के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में जजों की कार्यशील संख्या बढ़कर 37 हो गई है, जिससे स्वीकृत 38 पदों में से अब केवल एक पद खाली रह गया है। इस शपथ ग्रहण समारोह से पहले सुप्रीम कोर्ट 32 जजों के साथ कार्य कर रहा था।

शपथ ग्रहण समारोह: मुख्य बिंदु और गरिमामय आयोजन

सर्वोच्च न्यायालय की दीर्घकालिक परंपराओं के अनुरूप यह गरिमामय समारोह ठीक सुबह 10:30 बजे शुरू हुआ, जब सभी गणमान्य व्यक्तियों ने मंच पर अपना स्थान ग्रहण किया। समारोह का आयोजन बेहद अनुशासित और तय प्रोटोकॉल के तहत किया गया:

  • नियुक्ति वारंट का पठन: समारोह की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट के महासचिव (सेक्रेटरी जनरल) ने औपचारिक रूप से चीफ जस्टिस (CJI) से कार्यवाही शुरू करने की अनुमति मांगी। इसके बाद, उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पांचों नवनियुक्त जजों के लिए जारी किए गए आधिकारिक नियुक्ति वारंट को पढ़कर सुनाया।
  • शपथ ग्रहण की प्रक्रिया: वरिष्ठता के क्रम में, प्रत्येक मनोनीत जज मंच पर बने पोडियम की ओर बढ़े। चीफ जस्टिस सूर्यकांत के सामने खड़े होकर उन्होंने ईश्वर के नाम पर शपथ ली (या सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान किया) और भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखने का संकल्प लिया।
  • रजिस्टर पर हस्ताक्षर: शपथ लेने के तुरंत बाद, प्रत्येक जज ने औपचारिक शपथ पत्र पर हस्ताक्षर किए, चीफ जस्टिस से हाथ मिलाया और दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच उन्हें स्वागत फोल्डर भेंट किया गया।
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इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट का सभागार दर्शकों से खचाखच भरा हुआ था। समारोह में सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान और सेवानिवृत्त जज, केंद्र सरकार के वरिष्ठ कानून अधिकारी, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के पदाधिकारी व सदस्य और नवनियुक्त जजों के परिवार के सदस्य विशेष रूप से उपस्थित थे।

नए जजों का परिचय

सुप्रीम कोर्ट के बेंच में शामिल हुए पांच नए सदस्यों में विभिन्न उच्च न्यायालयों (हाई कोर्ट) के चार प्रतिष्ठित मुख्य जज (चीफ जस्टिस) और सुप्रीम कोर्ट बार से सीधे पदोन्नत की गईं एक प्रमुख वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं। नवनियुक्त जजों का विवरण इस प्रकार है:

  1. जस्टिस शील नागू (Justice Sheel Nagu): इससे पहले वे पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य जज के रूप में कार्यरत थे। इनका मूल उच्च न्यायालय मध्य प्रदेश है और इन्हें पहली बार मई 2011 में उच्च न्यायालय का जज नियुक्त किया गया था।
  2. जस्टिस श्री चंद्रशेखर (Justice Shree Chandrashekhar): इससे पहले वे बॉम्बे उच्च न्यायालय के मुख्य जज थे। इनका मूल उच्च न्यायालय झारखंड है और जनवरी 2013 में उन्हें उच्च न्यायालय के जज के रूप में पदोन्नत किया गया था।
  3. जस्टिस संजीव सचदेवा (Justice Sanjeev Sachdeva): पूर्व में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य जज के रूप में कार्यरत थे। इनका मूल उच्च न्यायालय दिल्ली है।
  4. जस्टिस अरुण पल्ली (Justice Arun Palli): इससे पहले वे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य जज थे। इनका मूल उच्च न्यायालय पंजाब और हरियाणा है।
  5. वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना (Senior Advocate V. Mohana): एक बेहद अनुभवी अधिवक्ता जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में संवैधानिक, दीवानी (सिविल) और सेवा संबंधी मामलों में लंबे समय तक वकालत की है।
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वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना की सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में पदोन्नति भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। वह सुप्रीम कोर्ट बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में पदोन्नत होने वाली देश की केवल दूसरी महिला अधिवक्ता बन गई हैं। इससे पहले वर्ष 2018 में जस्टिस इंदु मल्होत्रा को सीधे बार से इस पद पर नियुक्त किया गया था।

उनकी इस नियुक्ति से देश की सर्वोच्च अदालत में महिला जजों का प्रतिनिधित्व भी दोगुना हो गया है। आज से पहले, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत एकमात्र महिला जज थीं। अगस्त 2021 के बाद से सुप्रीम कोर्ट में किसी भी महिला जज की नियुक्ति नहीं हुई थी, जिसे देखते हुए न्यायपालिका के शीर्ष स्तर पर लैंगिक विविधता और संतुलन को बढ़ावा देने की दिशा में मोहना की पदोन्नति को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम माना जा रहा है।

ये त्वरित नियुक्तियां चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा 22 मई और 27 मई को की गई सिफारिशों के बाद हुई हैं, जिन्हें केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय ने सोमवार को अपनी मंजूरी दी थी।

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