देश की सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली के प्रतिष्ठित और संभ्रांत ‘दिल्ली गोल्फ क्लब’ (Delhi Golf Club) को एक बड़ी लेकिन अस्थाई राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने क्लब परिसर के भीतर मौजूद ऐतिहासिक और संरक्षित स्मारकों के आसपास अतिक्रमण व गतिविधियों पर रोक लगाने के अपने ही पिछले आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने इस मामले में “असाधारण उदारता” दिखाते हुए सीलिंग की कार्रवाई को अगली सुनवाई यानी 22 जुलाई 2026 तक के लिए टाल दिया है।
यह राहत दिल्ली गोल्फ क्लब की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के अनुरोध पर दी गई है। सिब्बल ने कोर्ट से पक्ष रखने और स्मारकों के बेहतर संरक्षण के लिए रचनात्मक सुझाव तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया, “यद्यपि कोर्ट को अपने पिछले फैसले पर पुनर्विचार का कोई ठोस आधार नहीं दिखता, फिर भी असाधारण उदारता बरतते हुए नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) के अध्यक्ष और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को दिए गए सीलिंग के निर्देशों को अगली सुनवाई (22 जुलाई 2026) तक स्थगित रखा जाता है।”
क्या था सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख और पिछला आदेश?
इस अस्थाई राहत से पहले, बुधवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने बेहद कड़ा फैसला सुनाया था, जिसने क्लब प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ा दी थीं।
- लाल बंगला-1 और 2 पर कड़ा पहरा: कोर्ट ने क्लब के मुख्य प्रवेश द्वार के पास स्थित बेहद महत्वपूर्ण संरक्षित स्मारकों ‘लाल बंगला-1 और 2’ के 100 मीटर के दायरे में होने वाली सभी व्यावसायिक और अन्य गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। साथ ही NDMC और दिल्ली पुलिस को इस प्रतिबंधित क्षेत्र में आने वाले सभी निर्माणों को तुरंत सील करने का आदेश दिया गया था।
- 9 अन्य स्मारकों पर भी थी नजर: इसके अलावा, क्लब के विशाल परिसर के भीतर स्थित अन्य 9 प्राचीन ढांचों के 20 मीटर के दायरे में भी किसी भी प्रकार की गतिविधि पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। फिलहाल, 100 मीटर और 20 मीटर के इन दोनों ही प्रतिबंधात्मक आदेशों को जुलाई के अंत तक टाल दिया गया है।
ऐतिहासिक धरोहरों की बदहाली पर बरसी अदालत
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की ऐतिहासिक और पुरातात्विक विरासतों के संरक्षण को लेकर गहरी चिंता और नाराजगी जताई। पीठ ने राजधानी में स्मारकों की वर्तमान स्थिति को “चिंताजनक” करार देते हुए कहा कि शहर की अधिकांश प्राचीन धरोहरें उपेक्षा का शिकार हैं, वहां रखरखाव का कोई काम नहीं दिख रहा है और वे जर्जर हालत में पहुंच चुकी हैं।
मामले की शुरुआत कैसे हुई? यह पूरा विवाद सामाजिक कार्यकर्ता राजीव सूरी द्वारा दायर एक याचिका से शुरू हुआ था। इस याचिका में उन्होंने दिल्ली की पॉश डिफेंस कॉलोनी में स्थित लोधी काल के ऐतिहासिक स्मारक ‘गुमटी शेख अली’ के आसपास हो रहे अवैध अतिक्रमण का मुद्दा उठाया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने एक जांच आयोग का गठन किया था। वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन की अगुवाई वाले इस कोर्ट कमिश्नर पैनल ने जब दिल्ली गोल्फ क्लब का सर्वे किया, तो वहां स्थित 10 ऐतिहासिक ढांचों की बदतर हालत और उनके आसपास हो रहे अतिक्रमण का चौंकाने वाला खुलासा हुआ। इसी रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने यह कड़ा रुख अख्तियार किया है।
निशाने पर ASI: महानिदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी
एक तरफ जहां दिल्ली गोल्फ क्लब को कुछ समय की सांस लेने की मोहलत मिल गई है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को अदालत के तीखे गुस्से का सामना करना पड़ा है।
स्मारकों के संरक्षण और अपनी कानूनी जिम्मेदारियों को निभाने में नाकाम रहने पर सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई (ASI) के महानिदेशक (Director) को आड़े हाथों लिया। अदालत ने महानिदेशक को आधिकारिक नोटिस जारी कर पूछा है कि इस घोर लापरवाही के लिए उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “अधिनियम के प्रावधानों के तहत संरक्षित स्मारकों के आसपास किसी भी अवांछित गतिविधि को रोकने की जिम्मेदारी एएसआई की थी। यह स्मारक सीधे एएसआई के संरक्षण में होने के बावजूद वहां रखरखाव का कोई काम नहीं किया गया। विभाग का यह रवैया बेहद लापरवाह और कैजुअल है।”
सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई के महानिदेशक को आदेश दिया है कि वे 22 जुलाई 2026 को होने वाली अगली सुनवाई से पहले व्यक्तिगत रूप से हस्ताक्षरित हलफनामा (Personally Affirmed Explanation) कोर्ट में पेश कर इस लापरवाही का स्पष्टीकरण दें।

