सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कश्मीर आतंकी साजिश मामले में गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत आरोपी सुहैल अहमद थोकर को जमानत दे दी है। अदालत ने थोकर की लंबी हिरासत और मुकदमे (ट्रायल) के पूरा होने में लगने वाले संभावित समय को देखते हुए यह राहत प्रदान की है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पांचोली की तीन सदस्यीय पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के सितंबर 2023 के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर यह फैसला सुनाया, जिसमें थोकर को जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि थोकर को दिल्ली की विशेष एनआईए (NIA) अदालत की संतुष्टि के अनुसार जमानत बांड प्रस्तुत करने पर रिहा किया जाए।
क्या है मामला? अनुच्छेद 370 के बाद की साजिश का आरोप
अभियोजन पक्ष और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के अनुसार, यह मामला 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद घाटी में रची गई एक बड़ी साजिश से जुड़ा है।
एनआईए का आरोप है कि लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिद्दीन जैसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों ने पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं और मददगारों के साथ मिलकर एक साजिश रची थी। इस साजिश का उद्देश्य था:
- स्थानीय और संवेदनशील युवाओं को भड़काना और उनका ब्रेनवॉश करना।
- ‘हाइब्रिड’ आतंकवादियों की भर्ती करना।
- घाटी में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देना।
जांच एजेंसी ने सुहैल अहमद थोकर पर इस पूरी साजिश में सक्रिय भूमिका निभाने का आरोप लगाया था। एजेंसी के अनुसार, थोकर ने इन प्रतिबंधित संगठनों के सक्रिय सदस्यों और उनके सहयोगियों को सुरक्षित ठिकाना (पनाह) और आवश्यक रसद (लॉजिस्टिक्स) मुहैया कराई थी।
निचली अदालतों से सुप्रीम कोर्ट तक की कानूनी जंग
सुहैल अहमद थोकर को सुरक्षा एजेंसियों ने 20 अक्टूबर 2021 को यूएपीए और तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया था। तब से वह लगातार हिरासत में थे।
सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने से पहले थोकर को निचली अदालतों में लगातार निराशा हाथ लगी थी:
- जनवरी 2023: एक विशेष ट्रायल कोर्ट ने थोकर की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था।
- सितंबर 2023: दिल्ली हाईकोर्ट ने भी ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए थोकर की अपील खारिज कर दी थी।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान थोकर के बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी थी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ किसी भी आतंकी साजिश में शामिल होने का कोई पुख्ता सबूत नहीं है। इसके अलावा, गिरफ्तारी के समय थोकर के पास से कोई भी आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई थी।
दूसरी ओर, एनआईए के वकील ने जमानत का कड़ा विरोध किया था। जांच एजेंसी का दावा था कि उनके पास यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि थोकर कश्मीर घाटी में सक्रिय आतंकियों को रसद और अन्य जरूरी सहायता पहुंचाने में सीधे तौर पर शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दी जमानत?
जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने आरोपी के त्वरित सुनवाई (स्पीड ट्रायल) के अधिकार और लंबे समय तक जेल में रहने के पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया। शीर्ष अदालत ने पाया कि थोकर अक्टूबर 2021 से यानी करीब साढ़े तीन साल से हिरासत में हैं और इस मामले में ट्रायल पूरा होने में अभी काफी समय लग सकता है। अदालत ने माना कि ऐसी स्थिति में आरोपी को और अधिक समय तक बिना ट्रायल के हिरासत में रखना न्यायसंगत नहीं है।

