मशहूर गायक और संगीतकार जुबीन गर्ग की मौत के मामले में मुख्य आरोपी श्यामकानू महंता की जमानत याचिका पर फिलहाल सस्पेंस बरकरार है। गौहाटी हाई कोर्ट ने शुक्रवार को हुई सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए अगली तारीख 22 मई तय की है। न्यायमूर्ति मिताली ठाकुरिया की अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की संवेदनशीलता और विस्तृत ‘केस डायरी’ की समीक्षा के बाद ही कोई आदेश पारित किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान आरोपी महंता के वकील वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। बचाव पक्ष ने अदालत को सूचित किया कि वे मामले से जुड़े कुछ नए दस्तावेज और एक अतिरिक्त हलफनामा (affidavit) पेश करना चाहते हैं। कोर्ट ने इन दस्तावेजों को दाखिल करने के लिए 18 मई तक का समय दिया है।
अदालत में महाधिवक्ता (Advocate General) देवजीत सैकिया भी उपस्थित रहे। विशेष लोक अभियोजक (SPP) जियाउल कमर ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “आमतौर पर शुरुआती चरणों में कोर्ट बिना केस डायरी देखे भी जमानत दे सकता है, लेकिन यह एक हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील मामला है। केस डायरी काफी बड़ी है, इसलिए माननीय न्यायाधीश ने रिकॉर्ड्स के गहन अध्ययन के लिए समय मांगा है।”
श्यामकानू महंता के लिए यह पहली कोशिश नहीं थी। इससे पहले 30 अप्रैल को एक विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि आरोपी के “फरार होने का जोखिम” है।
गौरतलब है कि असम पुलिस की सीआईडी (CID) द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने पिछले साल दिसंबर में सात लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। महंता उन चार आरोपियों में से एक हैं जिन पर सीधे तौर पर हत्या का आरोप लगाया गया है।
जुबीन गर्ग की मौत का मामला शुरू से ही विवादों में रहा है। 19 सितंबर को सिंगापुर के लाजर द्वीप (Lazarus Island) पर तैराकी के दौरान डूबने से उनकी मृत्यु हो गई थी। वह वहां ‘नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल’ में प्रस्तुति देने के लिए गए थे।
इस घटना पर दो अलग-अलग जांच रिपोर्ट सामने आई हैं:
- सिंगापुर पुलिस: उनकी जांच के अनुसार, मौत में किसी भी तरह की साजिश या ‘फाउल प्ले’ के सबूत नहीं मिले हैं।
- असम सरकार: मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने नवंबर में राज्य विधानसभा में कड़ा रुख अपनाते हुए इसे “साफ तौर पर हत्या” का मामला बताया था।
असम के अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि सिंगापुर पुलिस के निष्कर्षों का भारतीय अदालतों में चल रहे हत्या के मुकदमे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। अब सबकी निगाहें 22 मई पर टिकी हैं, जब हाई कोर्ट इस मामले में अपना अगला रुख साफ करेगा।

