नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड: बॉम्बे हाईकोर्ट ने दोषी शरद कलस्कर को दी जमानत

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को तर्कवादी और अंधश्रद्धा निर्मूलन कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर की 2013 में हुई हत्या के मामले में दोषी शरद कलस्कर को जमानत दे दी है। कलस्कर को इसी साल की शुरुआत में इस हत्याकांड में दोषी ठहराया गया था।

जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस रंजीतसिंह भोसले की बेंच ने ₹50,000 के मुचलके पर कलस्कर की रिहाई का आदेश दिया। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने इस आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। कलस्कर को पिछले साल अक्टूबर में गोविंद पानसरे हत्याकांड में भी जमानत मिल चुकी है, जिसके बाद अब कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होते ही वह जेल से बाहर आ सकेगा।

महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (MANS) के संस्थापक, 67 वर्षीय नरेंद्र दाभोलकर की 20 अगस्त 2013 को पुणे में सुबह की सैर के दौरान दो मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

शुरुआत में इस मामले की जांच स्थानीय पुलिस ने की थी, लेकिन दाभोलकर की बेटी मुक्ता दाभोलकर की याचिका पर 2014 में हाईकोर्ट ने जांच सीबीआई (CBI) को सौंप दी। 10 मई 2024 को एक सत्र न्यायालय ने कलस्कर और सह-आरोपी सचिन अंदुरे को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, अदालत ने सबूतों के अभाव में तीन अन्य आरोपियों—वीरेंद्र सिंह तावड़े, संजीव पुनालेकर और विक्रम भावे को बरी कर दिया था। साथ ही, अदालत ने आरोपियों पर लगाए गए कड़े कानून यूएपीए (UAPA) और आर्म्स एक्ट की धाराओं को भी हटा दिया था।

कलस्कर ने अपनी सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और अपील पर अंतिम सुनवाई होने तक जमानत की मांग की थी। कलस्कर की ओर से वकील शुभदा खोत ने पैरवी की।

दूसरी ओर, मुक्ता दाभोलकर ने भी हाईकोर्ट में एक अपील दायर की है, जिसमें अन्य आरोपियों को बरी किए जाने और यूएपीए की धाराओं को हटाए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है। उनकी याचिका में दावा किया गया है कि यह हत्या कोई अकेली घटना नहीं थी, बल्कि दक्षिणपंथी चरमपंथियों द्वारा रची गई एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी।

दाभोलकर की हत्या के बाद देश में कई अन्य तर्कवादियों और कार्यकर्ताओं की हत्याओं का सिलसिला शुरू हुआ था, जिनमें गोविंद पानसरे (2015), एम.एम. कलबुर्गी (2015) और पत्रकार गौरी लंकेश (2017) शामिल हैं।

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हाईकोर्ट के विस्तृत आदेश की प्रति अभी उपलब्ध नहीं हुई है, लेकिन एक दशक से अधिक पुराने इस मामले में यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है। कलस्कर कम्युनिस्ट नेता गोविंद पानसरे की हत्या के मामले में भी मुकदमे का सामना कर रहा है, हालांकि उस मामले में उसे 2023 के अंत में ही जमानत मिल गई थी।

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