दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक नया नोटिस जारी किया है। यह नोटिस प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर उन याचिकाओं पर दिया गया है, जिनमें निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी गई है जिसमें केजरीवाल को समन की अनदेखी करने के दो मामलों में बरी कर दिया गया था।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने रजिस्ट्री की रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए यह निर्देश दिया। रिपोर्ट में बताया गया था कि 1 अप्रैल को जारी किया गया पिछला नोटिस पूर्व मुख्यमंत्री तक नहीं पहुंच सका था। ED के वकील ने अदालत को सूचित किया कि नोटिस जारी होने के बावजूद केजरीवाल की ओर से कोई भी पेश नहीं हुआ है।
हाईकोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 जुलाई की तारीख तय की है।
यह कानूनी विवाद ED की उस शिकायत से शुरू हुआ था जिसमें आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री ने आबकारी नीति मामले की जांच में शामिल होने के लिए जारी किए गए समन का जानबूझकर उल्लंघन किया। एजेंसी का दावा है कि केजरीवाल ने जांच में शामिल न होने के लिए “तुच्छ आपत्तियां” उठाईं और जानबूझकर आधार तैयार किए।
हाईकोर्ट में ED ने दलील दी कि निचली अदालत ने उन्हें बरी करके “गंभीर त्रुटि” की है। एजेंसी के अनुसार, इस बात में कोई विवाद नहीं था कि समन विधिवत जारी किए गए थे और केजरीवाल को प्राप्त भी हुए थे, फिर भी वे जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए।
ED ने यह भी आरोप लगाया है कि नीति बनाने के दौरान अन्य आरोपी केजरीवाल के संपर्क में थे, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें अनुचित लाभ मिला और आम आदमी पार्टी को कथित तौर पर रिश्वत दी गई।
इससे पहले 22 जनवरी को निचली अदालत ने केजरीवाल के पक्ष में फैसला सुनाया था। अदालत ने कहा था कि ED यह साबित करने में विफल रही कि केजरीवाल ने जानबूझकर समन की अवहेलना की। अदालत ने विशेष रूप से ईमेल के माध्यम से समन भेजने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।
निचली अदालत ने टिप्पणी की थी, “ED न तो ईमेल के माध्यम से समन की तामील साबित कर पाई है और न ही प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 50(2) के तहत ईमेल से समन भेजने की प्रक्रिया को कानून के अनुसार साबित किया जा सका है।”
इसके अलावा, 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल और मनीष सिसोदिया सहित 21 अन्य को CBI से जुड़े मामले में भी आरोपमुक्त कर दिया था। अदालत ने कहा था कि CBI का मामला न्यायिक जांच का सामना करने में पूरी तरह असमर्थ है। CBI ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की है जो अभी लंबित है।
अरविंद केजरीवाल वर्तमान में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अंतरिम जमानत पर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने PMLA के तहत “गिरफ्तारी की आवश्यकता” से जुड़े कानूनी सवालों को विस्तृत विचार-विमर्श के लिए बड़ी बेंच के पास भेज दिया है।

