केंद्र के हस्तक्षेप के बाद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की याचिका बंद; दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ के प्रसारण पर रोक के मामले में दिया निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई द्वारा दायर उस याचिका का निस्तारण कर दिया, जिसमें ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ नामक डॉक्यूसीरीज की रिलीज को रोकने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि केंद्र सरकार द्वारा इस सीरीज के प्रसारण के खिलाफ जारी की गई एडवाइजरी के बाद अब इस मामले में कुछ शेष नहीं रह गया है और यह याचिका अब निष्प्रभावी (Infructuous) हो गई है।

मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य मुद्दा लॉरेंस बिश्नोई के जीवन और उसके आपराधिक सफर पर आधारित डॉक्यूसीरीज के प्रसारण को रोकना था। जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कार्यवाही को बंद करते हुए कहा कि चूंकि केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सार्वजनिक व्यवस्था और संगठित अपराध के महिमामंडन की चिंताओं को देखते हुए पहले ही इसे रिलीज न करने की सलाह दी है, इसलिए वर्तमान याचिका का आधार समाप्त हो जाता है।

33 वर्षीय लॉरेंस बिश्नोई, जो वर्तमान में गुजरात की जेल में बंद है और पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड का मुख्य आरोपी है, ने ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ के खिलाफ कोर्ट का रुख किया था। सीरीज के निर्माताओं के अनुसार, यह शो छात्र राजनीति, विचारधारा और मीडिया के प्रभाव के माध्यम से एक अपराधी की पहचान बनने के सफर को चित्रित करता है।

इस मामले में नया मोड़ तब आया जब पंजाब पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिखकर इस डॉक्यूसीरीज पर रोक लगाने का आग्रह किया। पुलिस का तर्क था कि ऐसी सामग्री से युवाओं के अपराध की ओर आकर्षित होने का खतरा है और यह सार्वजनिक शांति के लिए चुनौती बन सकती है। इसके बाद केंद्र सरकार ने 23 और 24 अप्रैल को एडवाइजरी जारी कर ZEE5 को इसे प्रसारित न करने का निर्देश दिया था।

सुनवाई के दौरान ZEE5 के वरिष्ठ वकील ने हाईकोर्ट को सूचित किया कि वे केंद्र सरकार की इन एडवाइजरी को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती देने की प्रक्रिया में हैं, क्योंकि यह निर्देश पंजाब पुलिस के इनपुट पर आधारित हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र नहीं बनता है।

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वहीं, बिश्नोई के वकील ने आशंका जताई कि निर्माता पात्रों के नाम बदलकर या किसी अन्य रूप में इस डॉक्यूसीरीज को रिलीज कर सकते हैं।

जस्टिस कौरव ने स्पष्ट किया कि जब तक केंद्र की एडवाइजरी प्रभावी है, निर्माता इसे रिलीज नहीं कर पाएंगे। अदालत ने मौखिक रूप से कहा, “जब तक ये एडवाइजरी रद्द नहीं हो जातीं, वे इसे रिलीज नहीं कर सकते।”

याचिकाकर्ता की भविष्य की चिंताओं पर हाईकोर्ट ने कहा कि यदि निर्माता कोई नया कदम उठाते हैं, तो याचिकाकर्ता दोबारा कानूनी कार्रवाई के लिए स्वतंत्र है। अपने अंतिम आदेश में अदालत ने कहा:

“अदालत का मानना है कि इस रिट याचिका में उठाया गया कारण अब निष्प्रभावी हो गया है। जारी की गई एडवाइजरी को देखते हुए यह हाईकोर्ट पाता है कि उत्तरदाता (ZEE5) शायद ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ की सामग्री को रिलीज नहीं करेंगे।”

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हाईकोर्ट ने बिश्नोई को यह छूट भी दी कि यदि ओटीटी प्लेटफॉर्म इन एडवाइजरी को चुनौती देता है, तो वह उस कानूनी प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर सकता है या उचित कदम उठा सकता है।

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