गुरुग्राम में अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: हरियाणा के शीर्ष अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी

सुप्रीम कोर्ट ने अवैध शहरी निर्माणों पर रोक लगाने के अपने दिसंबर 2024 के ऐतिहासिक फैसले को लागू न करने पर हरियाणा सरकार के आला अधिकारियों को फटकार लगाई है।

देश में बढ़ते अवैध निर्माणों पर नकेल कसने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने हरियाणा सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को अदालत की अवमानना का नोटिस जारी किया है। यह मामला गुरुग्राम में एक विवादित भूमि पर हुए अवैध निर्माण और अदालती निर्देशों की अनदेखी से जुड़ा है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रतिवादियों को 17 मई तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने 17 दिसंबर, 2024 को एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए अवैध निर्माणों को रोकने के लिए देशभर के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए थे। इस फैसले के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे:

  • किसी भी इमारत को बिजली, पानी और सीवरेज जैसे नागरिक कनेक्शन देने से पहले ‘कम्प्लीशन’ और ‘ऑक्यूपेशन’ सर्टिफिकेट अनिवार्य होगा।
  • अवैध घोषित इमारतों को ट्रेड लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा।
  • गलत तरीके से निर्माण की अनुमति देने वाले अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी।
  • इन नियमों का उल्लंघन करने पर अधिकारियों के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही की जाएगी।
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राजदरबार आइकॉनिक वेंचर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर इस याचिका में हरियाणा के मुख्य सचिव, वरिष्ठ नगर योजनाकार, नगर निगम के अधिकारी और बिजली उपयोगिता के अधिकारियों को नामजद किया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन अधिकारियों ने दिसंबर 2024 के फैसले की “जानबूझकर अवज्ञा” की है।

विवाद गुरुग्राम के चक्कपुर गांव में स्थित 1.39 एकड़ के भूखंड से संबंधित है। आरोप है कि इस जमीन पर बिना किसी वैधानिक अनुमति के अतिक्रमण किया गया और एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण कर दिया गया। याचिका में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवैध ढांचों को नागरिक सुविधाएं देने पर रोक के बावजूद, स्थानीय अधिकारियों ने वहां बिजली और पानी की आपूर्ति जारी रखी, जिससे अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिला।

याचिका के अनुसार, कंपनी ने दिसंबर 2024 से जनवरी 2025 के बीच हरियाणा सरकार और संबंधित विभागों को कई बार पत्र लिखकर अदालती निर्देशों को लागू करने की मांग की थी। जब अधिकारियों ने अवैध परिसर की सेवाएं काटने या निर्माण पर कार्रवाई करने में कोई रुचि नहीं दिखाई, तब कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का परिणाम गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में शहरी प्रशासन के लिए एक मिसाल बनेगा। वर्तमान में, अदालत ने कथित अवमाननाकर्ताओं की व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी है, लेकिन 17 मई तक जवाब दाखिल करने की अनिवार्यता ने हरियाणा प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

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