स्पाइसजेट बनाम कलानिधि मारन: ₹144 करोड़ जमा करने के आदेश पर पुनर्विचार याचिका, दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को स्पाइसजेट और उसके प्रमोटर अजय सिंह द्वारा दायर उन पुनर्विचार याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिसमें अदालत के पिछले आदेश को चुनौती दी गई है। इस आदेश में एयरलाइन को कलानिधि मारन और कल एयरवेज के साथ चल रहे कानूनी विवाद के संबंध में ₹144 करोड़ जमा करने का निर्देश दिया गया था।

जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह निर्णय लिया। सुनवाई के दौरान एयरलाइन की वित्तीय स्थिति और सुरक्षा (security) के रूप में जमा की जाने वाली राशि के स्वरूप पर विस्तृत चर्चा हुई।

यह कानूनी लड़ाई फरवरी 2015 से जुड़ी है, जब कलानिधि मारन और कल एयरवेज ने स्पाइसजेट में अपनी 58.46% हिस्सेदारी (35.04 करोड़ इक्विटी शेयर) इसके सह-संस्थापक अजय सिंह को मात्र ₹2 के मामूली मूल्य पर हस्तांतरित कर दी थी। उस समय एयरलाइन गहरे वित्तीय संकट से गुजर रही थी। विवाद का मुख्य केंद्र स्वामित्व हस्तांतरण के बाद मारन के पक्ष में वारंट जारी न करना है।

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इस साल 19 जनवरी को हाईकोर्ट ने स्पाइसजेट और अजय सिंह को छह सप्ताह के भीतर ₹144 करोड़ जमा करने का निर्देश दिया था। यह राशि ₹194 करोड़ की स्वीकार की गई देनदारी (admitted liability) के बदले मांगी गई थी। 18 मार्च को अदालत ने इस जमा राशि के लिए चार सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया था, जिसके खिलाफ अब पुनर्विचार याचिका दायर की गई है।

स्पाइसजेट की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि एयरलाइन वर्तमान में गंभीर “वित्तीय संकट” का सामना कर रही है, जो पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध जैसे बाहरी कारणों से और गहरा गया है।

रोहतगी ने जोर देकर कहा कि नकद जमा करने का दबाव एयरलाइन के संचालन को खतरे में डाल सकता है। उन्होंने कहा, “सरकार मुझे कुछ राहत देगी और मैं वह राहत उन्हें (मारन) प्रदान करूंगा। अंततः, जनहित की मांग भी यही है कि हम देश की तीन प्रमुख एयरलाइनों में से एक को बंद न होने दें।”

याचिकाकर्ताओं ने नकद राशि के बजाय गुरुग्राम में एक कमर्शियल प्रॉपर्टी को सुरक्षा के रूप में पेश करने का प्रस्ताव दिया। रोहतगी ने दलील दी कि कानून यह अनिवार्य नहीं करता कि सुरक्षा केवल नकद रूप में ही हो; इसे संपत्ति, बॉन्ड या अंडरटेकिंग के रूप में भी स्वीकार किया जा सकता है।

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कलानिधि मारन और कल एयरवेज का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता जयंत मेहता ने इन याचिकाओं का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि वित्तीय संकट के जिन आधारों का हवाला एयरलाइन दे रही है, उन्हें सुप्रीम कोर्ट पहले ही विचार कर खारिज कर चुका है। प्रतिवादियों का कहना था कि मामले के इतिहास और स्वीकार की गई देनदारियों को देखते हुए नकद जमा का आदेश पूरी तरह उचित है।

यह सुनवाई मई 2024 के उस महत्वपूर्ण फैसले के बाद हो रही है, जिसमें हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने सिंगल जज के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसने स्पाइसजेट को ब्याज सहित ₹579 करोड़ वापस करने का निर्देश दिया था। जस्टिस यशवंत वर्मा और जस्टिस रविंदर डुडेजा की पीठ ने मामले को नए सिरे से विचार के लिए वापस भेज दिया था, जिसके बाद अब सुरक्षा राशि को लेकर यह कानूनी प्रक्रिया चल रही है।

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