सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गाजियाबाद में चार साल की मासूम बच्ची के साथ हुए जघन्य बलात्कार और हत्या के मामले में स्थानीय पुलिस के ढुलमुल रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई है। चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने एफआईआर दर्ज करने और जांच में हुई देरी को लेकर पुलिस को फटकार लगाई। इसके साथ ही, अदालत ने उन दो निजी अस्पतालों से भी जवाब तलब किया है, जिन्होंने कथित तौर पर गंभीर रूप से घायल बच्ची को इलाज देने से मना कर दिया था।
यह मामला पीड़िता के पिता, जो एक दिहाड़ी मजदूर हैं, की याचिका पर सुना जा रहा है। उन्होंने स्थानीय पुलिस की जांच पर अविश्वास जताते हुए मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) या सीबीआई (CBI) से कराने की मांग की है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा, “एफआईआर दर्ज करने से लेकर जांच तक, हर स्तर पर एक तरह की अनिच्छा (reluctance) दिखाई दी।”
पीड़िता के पिता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एन. हरिहरन ने अदालत को बताया कि घटना 16 मार्च की है, जब एक पड़ोसी ने चॉकलेट का लालच देकर बच्ची का अपहरण किया था। पिता को बच्ची खून से लथपथ और बेहोश मिली थी, लेकिन पुलिस ने 17 मार्च की सुबह 3:30 बजे तक एफआईआर दर्ज नहीं की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शुरुआत में पुलिस ने केवल हत्या की धाराएं लगाई थीं और दुष्कर्म या पॉक्सो (POCSO) एक्ट का जिक्र नहीं किया था। बाद में 3 अप्रैल को दाखिल चार्जशीट में गंभीर धाराएं जोड़ी गईं।
अदालत ने ‘खजान सिंह मानवी हेल्थ केयर’ और ‘सेंट जोसेफ हॉस्पिटल’ को हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। आरोप है कि इन अस्पतालों ने इलाज देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद बच्ची को सरकारी अस्पताल ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
वरिष्ठ वकील हरिहरन ने तर्क दिया कि यदि समय पर चिकित्सा सहायता मिलती, तो बच्ची की जान बच सकती थी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी अस्पताल आपातकालीन स्थिति में इलाज से इनकार नहीं कर सकता। बेंच ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे अस्पतालों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पुलिस का पक्ष रखते हुए बताया कि चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और कोर्ट ने उस पर संज्ञान भी ले लिया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए:
- चार्जशीट की कॉपी: पुलिस तुरंत पीड़िता के परिवार को चार्जशीट की प्रति उपलब्ध कराए।
- अस्पतालों से जवाब: दोनों निजी अस्पतालों को इलाज से इनकार करने के आरोपों पर अपना पक्ष रखना होगा।
- गोपनीयता का सम्मान: पुलिस और अस्पताल यह सुनिश्चित करें कि पीड़िता या उसके परिवार की पहचान उजागर न हो।
- परिजनों को सुरक्षा: राज्य पुलिस को सख्त हिदायत दी गई है कि वे पीड़ित परिवार को किसी भी तरह से परेशान न करें।
एसआईटी (SIT) के गठन की मांग पर बेंच ने कहा कि हम प्रक्रिया में और देरी नहीं चाहते। अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा कि वे चार्जशीट का अध्ययन करें और यदि उसमें कोई खामी नजर आती है, तो अदालत को सूचित करें। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।

