संजय भंडारी को बड़ा झटका: दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ घोषित करने के फैसले को रखा बरकरार

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को ब्रिटेन स्थित हथियार डीलर संजय भंडारी की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने खुद को “भगोड़ा आर्थिक अपराधी” (FEO) घोषित किए जाने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के लिए यह एक बड़ी जीत है, क्योंकि इस टैग के बाद अब एजेंसी भंडारी की करोड़ों रुपये की संपत्ति को जब्त करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर सकेगी।

जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने अपील को खारिज करते हुए संक्षिप्त आदेश दिया और कहा, “अपील खारिज की जाती है।”

यह कानूनी विवाद फरवरी 2017 में शुरू हुआ था, जब ED ने संजय भंडारी (63) और अन्य के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया था। यह कार्रवाई आयकर विभाग द्वारा 2015 के काला धन विरोधी कानून के तहत दाखिल की गई चार्जशीट के आधार पर की गई थी।

संजय भंडारी साल 2016 में दिल्ली में आयकर विभाग की छापेमारी के तुरंत बाद लंदन भाग गया था। ED ने 2020 में उसके खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की। जांच एजेंसी भंडारी के कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति और व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा के साथ कथित संबंधों की भी जांच कर रही है।

5 जुलाई, 2025 को एक ट्रायल कोर्ट ने ED की याचिका पर भंडारी को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था, जिसे बाद में हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

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भंडारी के कानूनी दल ने दलील दी कि उन्हें भगोड़ा घोषित करना कानूनी रूप से गलत है। उनके वकीलों का तर्क था कि चूंकि एक ब्रिटिश अदालत ने उनके प्रत्यर्पण (Extradition) के खिलाफ फैसला सुनाया है, इसलिए उनका ब्रिटेन में रहना पूरी तरह से वैध है।

वकीलों ने कहा, “हमारे मुवक्किल के ब्रिटेन में रहने को अवैध नहीं कहा जा सकता क्योंकि उनके पास वहां रहने का कानूनी अधिकार है और भारत सरकार ब्रिटिश अदालत के फैसले से बंधी हुई है।” उन्होंने तर्क दिया कि जब कोई व्यक्ति विदेशी अदालत के संरक्षण में कानूनी रूप से रह रहा हो, तो उसे ‘भगोड़ा’ कहना कानूनन गलत है।

दूसरी ओर, प्रवर्तन निदेशालय ने तर्क दिया कि भंडारी बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद भारत में मुकदमे का सामना करने के लिए वापस नहीं आया। एजेंसी ने कहा कि FEO का दर्जा मिलना जरूरी है ताकि भंडारी की भारत और विदेश में स्थित संपत्तियों को कुर्क और जब्त किया जा सके।

हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए इस सिद्धांत को पुष्ट किया कि विदेशी कानूनी कार्यवाही किसी व्यक्ति को भारतीय कानून के दायरे से बाहर नहीं ले जाती।

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निचली अदालत ने पहले ही स्पष्ट किया था कि “भले ही ब्रिटेन में प्रत्यर्पण की कोशिश विफल रही हो, लेकिन यह आरोपी को ‘देवदूत’ नहीं बना देता और न ही वह भारतीय कानूनों के उल्लंघन के लिए अभियोजन से बच सकता है।” हाईकोर्ट ने इस रुख से सहमति जताते हुए माना कि भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के लिए जरूरी कानूनी शर्तें पूरी होती हैं, चाहे प्रत्यर्पण की स्थिति कुछ भी हो।

ब्रिटिश अदालत द्वारा प्रत्यर्पण के खिलाफ फैसला दिए जाने के बाद भंडारी की भारत वापसी की संभावनाएं अब लगभग खत्म हो गई हैं। हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब जांच एजेंसी (ED) के पास उसकी चिन्हित संपत्तियों को पूरी तरह जब्त करने का कानूनी रास्ता साफ हो गया है।

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