दिल्ली के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-VIII (सेंट्रल) ने एक स्मार्टफोन ब्लास्ट मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए ‘रियलमी मोबाइल टेलीकम्युनिकेशन (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड’ को सेवा में कमी और दोषपूर्ण उत्पाद बेचने का दोषी ठहराया है। फोन फटने से न केवल एक UPSC अभ्यर्थी शारीरिक रूप से घायल हुआ, बल्कि वह अपनी साल भर की मेहनत के बाद होने वाली प्रारंभिक परीक्षा में बैठने से भी वंचित रह गया।
आयोग के अध्यक्ष दिव्य ज्योति जयपुरियार और सदस्य डॉ. रश्मि बंसल की पीठ ने कंपनी की उस दलील को भी खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने इस घटना के लिए उपभोक्ता को ही जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की थी।
मामला: परीक्षा से ठीक पहले दहलाने वाली घटना
शिकायतकर्ता कोटि साईं पवन अपने पिता की रिटायरमेंट की जमा-पूंजी लगाकर यूपीएससी की तैयारी करने दिल्ली आए थे। 5 जून 2022 को उनकी प्रारंभिक परीक्षा थी। हालांकि, परीक्षा से ठीक एक दिन पहले 4 जून को तड़के 3:00 बजे, उनके पास रखा हुआ उनका ‘Realme XT’ फोन अचानक एक तेज धमाके के साथ फट गया और उसमें आग लग गई।
इस विस्फोट के कारण साईं पवन के बाएं हाथ और माथे पर ‘फर्स्ट डिग्री बर्न’ (जलने के निशान) आ गए। चोट और मानसिक सदमे के कारण वह अगले दिन परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच सके, जिससे उनकी साल भर की तैयारी और कोचिंग पर खर्च किए गए लाखों रुपये व्यर्थ चले गए।
सेवा केंद्र का रवैया और कंपनी की लापरवाही
शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि जब वह क्षतिग्रस्त फोन लेकर अधिकृत सर्विस सेंटर पहुंचे, तो वहां उनसे एक रसीद पर हस्ताक्षर करने को कहा गया। इस रसीद में लिखा था कि फोन में हुआ नुकसान “यूजर-इंड्यूस्ड” (उपयोगकर्ता की गलती से हुआ) है। साईं पवन ने इस पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया, जिसके बाद कंपनी ने उनका फोन लौटाने से भी इनकार कर दिया।
आयोग ने नोट किया कि कंपनी (OP) ने लिखित बयान तो दिया, लेकिन अपनी बात साबित करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं किया। आयोग ने कहा:
“रिकॉर्ड से पता चलता है कि कंपनी ने शिकायतकर्ता से यह स्वीकार करने को कहा कि नुकसान उसकी गलती से हुआ था… कंपनी ने अपना बचाव करने के लिए न तो सबूत पेश किए और न ही अंतिम बहस में हिस्सा लिया, जिससे स्पष्ट होता है कि उनके पास बचाव में कहने के लिए कुछ नहीं था।”
आयोग की सख्त टिप्पणी: “सुरक्षा से समझौता मंजूर नहीं”
उपभोक्ता आयोग ने स्पष्ट किया कि मोबाइल की बैटरी फटना एक गंभीर सुरक्षा चिंता का विषय है। आयोग ने अपने फैसले में कहा:
“फोन की बैटरी में विस्फोट एक गंभीर सुरक्षा मुद्दा है और निर्माता को हमेशा यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह किसी भी परिस्थिति में विफल न हो।”
पीठ ने आगे कहा कि “घटिया” (Sub-standard) बैटरी या फोन की आपूर्ति करना कंपनी की लापरवाही को दर्शाता है, जिससे कोई बड़ी अनहोनी भी हो सकती थी। आयोग ने विशेष रूप से अभ्यर्थी के भविष्य पर पड़े असर का उल्लेख किया और कहा कि साल में एक बार होने वाली परीक्षा छूटने से उसकी पूरी मेहनत बर्बाद हो गई।
फैसला: मुआवजा और हर्जाना
शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए आयोग ने रियलमी को कुल 1.5 लाख रुपये भुगतान करने का आदेश दिया:
- 1,00,000/- रुपये: शारीरिक दर्द, चोट और मानसिक उत्पीड़न के मुआवजे के तौर पर।
- 25,000/- रुपये: कंपनी के लापरवाह रवैये के लिए हर्जाने के तौर पर।
- 25,000/- रुपये: मुकदमेबाजी के खर्च (Litigation Cost) के रूप में।
आयोग ने निर्देश दिया कि यह राशि 1 अक्टूबर 2022 (शिकायत दर्ज करने की तारीख) से 6% वार्षिक ब्याज के साथ दी जाए। यदि कंपनी 30 दिनों के भीतर भुगतान नहीं करती है, तो ब्याज की दर बढ़ाकर 9% कर दी जाएगी।
केस विवरण
- केस का शीर्षक: कोटि साईं पवन बनाम रियलमी मोबाइल टेलीकम्युनिकेशन (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड
- केस संख्या: DC/77/CC/120/2022
- आदेश की तिथि: 7 अप्रैल, 2026

