पश्चिम एशिया संघर्ष में जान गंवाने वाले भारतीय नाविक के अवशेषों के DNA टेस्ट का बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिया आदेश

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए शिपिंग के डिप्टी डायरेक्टर जनरल (DDG) को 25 वर्षीय भारतीय नाविक के अवशेषों को एकत्र करने और उनके DNA विश्लेषण का निर्देश दिया है। नाविक दीक्षित सोलंकी की मौत इसी महीने की शुरुआत में ओमान तट के पास एक तेल टैंकर पर हुए ड्रोन हमले में हो गई थी।

मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अनखद की खंडपीठ ने आदेश दिया कि परिजनों की उपस्थिति में अवशेषों को एकत्र किया जाए और उन्हें मुंबई स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजा जाए। यह निर्देश सोलंकी के पिता और बहन द्वारा दायर उस याचिका पर आया है, जिसमें उन्होंने शव की पहचान सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक जांच की मांग की थी, ताकि अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ किया जा सके।

यह मामला 1 मार्च को ओमान तट के पास तेल टैंकर ‘MT MKD Vyom’ पर हुए हमले से जुड़ा है। विस्फोटक से लदे एक ड्रोन ने जहाज को निशाना बनाया था, जिसमें चालक दल के सदस्य दीक्षित सोलंकी गंभीर रूप से घायल हो गए थे और 4 मार्च को उन्होंने दम तोड़ दिया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, 28 फरवरी को शुरू हुए पश्चिम एशिया संघर्ष के इस नए चरण में दीक्षित सोलंकी पहले भारतीय हताहत हैं। उनके पिता अमृतलाल सोलंकी और बहन मिताली ने पिछले हफ्ते हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने केंद्र सरकार पर इस मामले में स्पष्ट जानकारी न देने का आरोप लगाया था। रविवार को जब अवशेष भारत पहुंचे, तो वे पूरी तरह से जले हुए थे, जिसके बाद परिवार ने DNA टेस्ट के बिना उनकी पहचान स्वीकार करने में असमर्थता जताई थी।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और शिपिंग महानिदेशालय की ओर से पेश वकील रुई रोड्रिग्स ने कोर्ट को बताया कि प्रशासन ने इस संबंध में महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक, मुंबई पुलिस आयुक्त और हैदराबाद व मुंबई की फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र भेज दिया है।

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सोलंकी परिवार की वकील प्रज्ञा तालेकर ने अदालत से DNA रिपोर्ट सौंपने के लिए एक समय सीमा तय करने का आग्रह किया। हालांकि, बेंच ने फिलहाल कोई निश्चित समय सीमा तय करने से इनकार कर दिया और अधिकारियों को प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा।

याचिका में इस बात पर जोर दिया गया कि “गरिमा के साथ रहने का मौलिक अधिकार मृत्यु के बाद भी व्यक्ति पर लागू होता है।” परिवार ने तर्क दिया कि अधिकारियों का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वे अपने नागरिक के अवशेषों को सम्मानजनक तरीके से और समय पर उनके परिजनों को सौंपें। याचिका में अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का भी हवाला दिया गया, जो समुद्र में मृत्यु होने पर शव की वापसी के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करते हैं।

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अपने आदेश में खंडपीठ ने निम्नलिखित निर्देश दिए:

  • DDG शिपिंग परिजनों की मौजूदगी में अवशेषों को एकत्र करेंगे।
  • इन अवशेषों को पहचान के लिए विशेष रूप से मुंबई स्थित FSL भेजा जाएगा।
  • DNA विश्लेषण की रिपोर्ट की एक प्रति सीधे पीड़ित परिवार को उपलब्ध कराई जाएगी।

परिवार के लिए यह पहचान अनिवार्य है ताकि वे अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार दीक्षित का अंतिम संस्कार कर सकें।

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