बंगाल चुनाव: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, नहीं हटेंगे केंद्रीय बल; 59 लाख से अधिक वोटर दावों का हुआ निपटारा

पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों की शुचिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हालिया हिंसक घटनाओं और व्यवधानों को देखते हुए राज्य से केंद्रीय सुरक्षा बलों को फिलहाल नहीं हटाया जाएगा। चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पांचोली की बेंच ने नोट किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के तहत हटाए गए नामों से जुड़े लगभग 59.15 लाख दावों और आपत्तियों का निपटारा सोमवार दोपहर तक कर लिया गया है।

यह आदेश उन रिपोर्ट्स के बाद आया है जिनमें बताया गया था कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामलों की सुनवाई कर रहे न्यायिक अधिकारियों को ‘घेराव’ और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।

सुरक्षा चिंताओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि अतीत की घटनाओं को देखते हुए केंद्रीय बलों को वापस नहीं बुलाया जाएगा। बेंच ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर चेतावनी देते हुए कहा, “अगर राज्य मशीनरी (प्रशासन) सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहती है, तो हम देखेंगे कि क्या किया जा सकता है।”

अदालत ने इस बात पर भी संतोष जताया कि मालदा जैसे संवेदनशील जिले में, जहां न्यायिक अधिकारियों को भारी विरोध और बाधाओं का सामना करना पड़ा, वहां भी लगभग आठ लाख मामलों का निपटारा किया जा चुका है।

चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने बेंच को सूचित किया कि शेष बचे सभी दावों का निपटारा आज ही कर लिया जाएगा। इसके साथ ही सोमवार रात तक एक ‘सप्लीमेंट्री इलेक्टोरल रोल’ (पूरक मतदाता सूची) प्रकाशित कर दी जाएगी।

READ ALSO  पुलिस स्टेशन में फायरिंग मामले में पूर्व बीजेपी विधायक गणपत गायकवाड़ को जमानत देने से बॉम्बे हाईकोर्ट का इनकार

प्रशासनिक कार्यों को सुचारू बनाने के लिए कोर्ट ने डिजिटल हस्ताक्षर अपलोड करने की समय सीमा 7 अप्रैल तक बढ़ा दी है। सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने चुनाव आयोग की जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए कहा कि आयोग का काम “चुनावी भागीदारी को बढ़ाना है, न कि उसे सीमित करना।”

सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कोर्ट को बताया कि मतदाता सूची से नाम हटाने के फैसलों को चुनौती देने के लिए बनाए गए 19 अपीलीय न्यायाधिकरण (Appellate Tribunals) अभी पूरी तरह कार्यात्मक नहीं हुए हैं।

READ ALSO  झारखंड हाईकोर्ट ने CAA के तहत अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई पर स्पष्टीकरण मांगा

इस पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पूर्व वरिष्ठ जजों का एक तीन सदस्यीय पैनल गठित करने का निर्देश दिया। इस पैनल की जिम्मेदारियां होंगी:

  • इन न्यायाधिकरणों के लिए एक समान कार्यप्रणाली (Uniform Procedure) तैयार करना।
  • 7 अप्रैल तक गाइडलाइंस फाइनल करना ताकि अपीलों का तेजी से निपटारा हो सके।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन न्यायाधिकरणों के पास मतदाता सूची में नाम शामिल करने या हटाने के कारणों की जांच करने और उन दस्तावेजों की समीक्षा करने का पूरा अधिकार होगा जो ऑनलाइन उपलब्ध नहीं हैं। बेंच ने जोर देकर कहा कि चुनाव से पहले इन ट्रिब्यूनल्स को निष्पक्ष और सुरक्षित माहौल में काम करने की अनुमति मिलनी चाहिए।

READ ALSO  Continuing IP Infringement: Mere Delay Does Not Negate Urgency for Bypassing Pre-Litigation Mediation Under Section 12A: SC
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles