मसूरी में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर हो रहे पेड़ों के कटान पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए मसूरी नगर पालिका को निर्देश दिया है कि वन विभाग की अनिवार्य अनुमति के बिना क्षेत्र में किसी भी पेड़ को न काटा जाए। यह मामला मसूरी के एक अधिसूचित वन क्षेत्र में ओक (बांज) के पेड़ों की अवैध कटाई से जुड़ा है।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने प्रवेश सिंह राणा द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता का आरोप था कि नगर पालिका सड़क विस्तार के बहाने मसूरी के हुसैन गंज इलाके में स्थित ओक के पेड़ों को काट रही है।
यह मामला मसूरी के संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्र में पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन से संबंधित है। याचिकाकर्ता के अनुसार, नगर पालिका ने हुसैन गंज, जो कि एक अधिसूचित वन क्षेत्र है, में सड़क चौड़ी करने के लिए पेड़ों को काटना शुरू कर दिया था।
बुधवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश की। यह रिपोर्ट मसूरी के वन क्षेत्राधिकारी द्वारा 13 मार्च को किए गए निरीक्षण पर आधारित थी। निरीक्षण में याचिकाकर्ता के दावों की पुष्टि हुई और पाया गया कि चार ओक के पेड़ों सहित कुल सात पेड़ बिना किसी वैध अनुमति के अवैध रूप से काटे गए थे। सरकार ने पीठ को बताया कि यह कार्रवाई सक्षम वन अधिकारियों की पूर्व अनुमति के बिना की गई थी।
अवैध कटान के जवाब में, राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया कि जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ चालान जारी किए गए हैं। इस मामले में जांच जारी है और संबंधित पक्षों के खिलाफ कानूनी मामले लंबित हैं।
वहीं, मसूरी नगर पालिका ने कोर्ट को बताया कि इस मामले की जांच पूरी होने तक सड़क चौड़ीकरण का काम फिलहाल रोक दिया गया है।
खंडपीठ ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि भविष्य में वन विभाग की लिखित सहमति के बिना इस क्षेत्र में कोई भी पेड़ नहीं काटा जाएगा। कोर्ट ने सभी पक्षों को याचिका पर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है।
इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी, जिसमें कोर्ट राज्य की जांच रिपोर्ट और नगर पालिका द्वारा पर्यावरणीय नियमों के पालन की समीक्षा करेगा।

