फेसबुक मार्केटप्लेस विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट ने मेटा के खिलाफ सीसीपीए की सख्त कार्रवाई पर लगाई रोक

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक (Meta Platforms Inc.) को बड़ी अंतरिम राहत देते हुए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) को निर्देश दिया है कि वह फेसबुक मार्केटप्लेस पर ‘अनधिकृत’ लिस्टिंग के मामले में कंपनी के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न करे। जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने स्पष्ट किया कि किसी भी सख्त कदम से पहले अमेरिकी सोशल मीडिया दिग्गज को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए।

यह मामला सीसीपीए के 1 जनवरी, 2026 के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें फेसबुक मार्केटप्लेस पर वॉकी-टॉकी की कथित अवैध बिक्री के लिए मेटा पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। इसके साथ ही प्राधिकरण ने मेटा को भविष्य में सभी उत्पादों की वैधानिक मंजूरी सुनिश्चित करने जैसे व्यापक निर्देश दिए थे, जिसे मेटा ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

इस कानूनी लड़ाई की जड़ फेसबुक मार्केटप्लेस के वर्गीकरण में है। सीसीपीए का मानना है कि यह एक ई-कॉमर्स संस्था है और इस पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम और आईटी नियम लागू होते हैं। दूसरी ओर, मेटा का तर्क है कि यह केवल एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का फीचर है।

मेटा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने दलील दी कि फेसबुक मार्केटप्लेस व्यक्तिगत रूप से सामान बेचने या बदलने के लिए ‘नेचुरल पर्सन्स’ (आम लोगों) के लिए एक मुफ्त सेवा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मेटा इसमें कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं करता और न ही कोई कमीशन लेता है। याचिका में कहा गया है कि सीसीपीए ने इस गलत धारणा के आधार पर अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है कि फेसबुक मार्केटप्लेस ई-कॉमर्स के कानूनी ढांचे के दायरे में आता है।

जस्टिस कौरव ने सीसीपीए द्वारा जारी किए गए व्यापक (Omnibus) निर्देशों पर सवाल उठाए। हालांकि मेटा ने वॉकी-टॉकी की लिस्टिंग को पहले ही ब्लॉक कर दिया है, लेकिन उसने उन निर्देशों पर आपत्ति जताई जिनमें उसे सभी उत्पादों की निगरानी करने और समय-समय पर ‘सेल्फ-ऑडिट’ करने को कहा गया था।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने बिहार, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में 'अनावश्यक' गर्भाशय-उच्छेदन के आरोप वाली जनहित याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा

जस्टिस कौरव ने कहा, “अदालत का मानना है कि याचिकाकर्ता को अस्पष्ट या बहुत व्यापक निर्देशों के आधार पर दंडित नहीं किया जा सकता… जब तक याचिकाकर्ता का कार्य स्पष्ट रूप से किसी लागू नियम या विनियमन का उल्लंघन नहीं करता, तब तक उसे दंडित नहीं किया जा सकता।” न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से पहले मेटा को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जाएगा।

मेटा ने सीसीपीए द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियमों का हवाला देने पर भी आपत्ति जताई। कंपनी का कहना है कि यह मामला इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के दायरे में आता है, न कि उपभोक्ता नियामक के। साथ ही, सार्वजनिक रूप से सेल्फ-ऑडिट प्रमाण पत्र प्रकाशित करने के निर्देश को “पालन करने में कठिन” बताया गया।

READ ALSO  ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे मामला स्थगित: इलाहाबाद हाईकोर्ट अब 5 मई को करेगा सुनवाई

हाईकोर्ट ने मेटा को यह स्वतंत्रता दी है कि वह जुर्माने और अधिकार क्षेत्र से जुड़ी अपनी शिकायतों को लेकर राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के पास जा सकती है।

उल्लेखनीय है कि सीसीपीए ने विभिन्न ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर वॉकी-टॉकी की अवैध बिक्री पर स्वतः संज्ञान लिया था, जिसमें अमेजन, फ्लिपकार्ट और जियोमार्ट जैसी कंपनियों को भी नोटिस जारी किए गए थे।

READ ALSO  Ford Endeavour के इंजन से असंतुष्ट था ग्राहक! सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी से 42 लाख रुपये मुआवजा दिलवाया
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles