उत्तम नगर झड़प मामला: नोटिस के बिना घर नहीं तोड़े जाएंगे, MCD के आश्वासन के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाएँ निपटाईं

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को उन याचिकाओं का निस्तारण कर दिया, जिनमें उत्तम नगर में हुई झड़प के बाद मकान तोड़े जाने की आशंका जताई गई थी। सुनवाई के दौरान नगर निगम दिल्ली (MCD) ने अदालत को आश्वासन दिया कि संबंधित घरों पर बिना पूर्व नोटिस के कोई भी तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं की जाएगी।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अमित बंसल के समक्ष हुई। याचिकाएँ जरीना, जो एक आरोपी की मां हैं, और शाहनाज द्वारा दायर की गई थीं। शाहनाज के बच्चों से पुलिस ने पूछताछ की थी। दोनों ने आशंका जताई थी कि उनके घरों पर बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए कार्रवाई हो सकती है।

अदालत के समक्ष MCD की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पोद्दार ने कहा कि संबंधित आवासीय परिसरों के खिलाफ कोई भी कदम उठाने से पहले नोटिस दिया जाएगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि आगे की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के तय मानकों के अनुरूप ही होगी। हालांकि, यह आश्वासन केवल इस मामले में संबंधित मकानों तक सीमित बताया गया।

4 मार्च को होली के दिन उत्तम नगर में दो पड़ोसी परिवारों के बीच पुराने विवाद को लेकर झड़प हुई थी, जिसमें 26 वर्षीय युवक की मौत हो गई। इस मामले में कई लोगों, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है, को हिरासत में लिया गया।

इसके बाद 8 मार्च को MCD ने एक आरोपी के परिवार के घर के एक हिस्से को यह कहते हुए तोड़ दिया कि वह सार्वजनिक नाले पर बना हुआ था। इस कार्रवाई के बाद इलाके में अन्य लोगों के बीच भी अपने घरों पर कार्रवाई की आशंका बढ़ गई।

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11 मार्च को हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के घरों को एक सप्ताह के लिए संरक्षण दिया था और उनसे अपनी शिकायतों को लेकर नई याचिका दायर करने को कहा था।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि बिना नोटिस के की जाने वाली तोड़फोड़ “मनमानी और अवैध” होगी। उनका तर्क था कि किसी आपराधिक मामले में मकान तोड़ना दंड के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता और ऐसी किसी भी कार्रवाई से पहले कारण बताओ नोटिस और सुनवाई का अवसर दिया जाना जरूरी है।

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इससे पहले MCD ने अदालत में कहा था कि कार्रवाई किसी एक परिवार को निशाना बनाकर नहीं की गई, बल्कि सार्वजनिक नाले पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए की गई थी। साथ ही यह भी कहा गया था कि ऐसे मामलों में कानून पूर्व नोटिस की अनिवार्यता नहीं रखता।

अदालत को यह भी बताया गया कि केवल मकानों के कुछ हिस्सों को ही हटाया गया था।

अब MCD द्वारा नोटिस देने के आश्वासन के बाद अदालत ने याचिकाओं का निस्तारण कर दिया।

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