परिवार न्यायालयों में काले कोट न पहनें, बच्चों के मन से डर खत्म करें: CJI सूर्यकांत

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार को परिवार न्यायालयों के कामकाज में बदलाव की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों के मन से “मानसिक भय” दूर करना बेहद जरूरी है। इसके लिए अदालतों के पारंपरिक माहौल और तौर-तरीकों में सुधार किए जाने चाहिए।

दिल्ली के रोहिणी में नए परिवार न्यायालय परिसर के शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए CJI ने कहा कि परिवार न्यायालयों का वातावरण ऐसा होना चाहिए, जहां बच्चे और परिवार के सदस्य सहज महसूस करें, न कि डर या दबाव में आएं।

काले कोट और औपचारिकता पर उठाए सवाल

मुख्य न्यायाधीश ने सवाल उठाया कि क्या परिवार न्यायालयों में जज और वकीलों द्वारा पहने जाने वाले काले कोट बच्चों के मन में डर पैदा करते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे मामलों में जज और वकील पारंपरिक वेशभूषा से परहेज कर सकते हैं।

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उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस अधिकारियों को भी वर्दी में पेश होने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इस तरह का औपचारिक और अधिकारपूर्ण माहौल बच्चों को असहज बना सकता है।

“डर-रहित और परिचित माहौल” की जरूरत

CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि परिवार न्यायालयों का उद्देश्य केवल विवादों का निपटारा करना नहीं है, बल्कि टूटते रिश्तों को सुधारना भी है। ऐसे मामलों में भावनात्मक पहलू बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए अदालतों को एक “परिचित और भरोसेमंद” वातावरण विकसित करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि परिवार न्यायालयों में आने वाले विवाद अक्सर उन लोगों के बीच होते हैं, जो कभी एक ही परिवार का हिस्सा रहे हैं और आगे भी बच्चों या अन्य जिम्मेदारियों के जरिए जुड़े रहते हैं। ऐसे मामलों का असर कानूनी दायरे से कहीं अधिक व्यापक होता है।

“फैमिली रेजोल्यूशन सेंटर” नाम देने का सुझाव

परिवार न्यायालयों की भूमिका को और बेहतर तरीके से दर्शाने के लिए CJI ने इन्हें “फैमिली रेजोल्यूशन सेंटर” नाम देने का विचार भी रखा। उनका मानना है कि इससे इन संस्थानों की छवि अधिक सहयोगात्मक और समाधान-केंद्रित बनेगी।

न्यायपालिका के सामने व्यावहारिक चुनौतियां

इस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस मनमोहन ने दिल्ली की जिला न्यायपालिका के सामने मौजूद प्रमुख चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि बजट, स्टाफ की कमी और स्थान की समस्या—ये तीन बड़े मुद्दे हैं, जिनसे न्यायपालिका जूझ रही है।

कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय भी उपस्थित रहे।

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रोहिणी में न्यायिक ढांचे के विस्तार की जरूरत

CJI सूर्यकांत ने कहा कि रोहिणी अब राष्ट्रीय राजधानी का एक प्रमुख आवासीय क्षेत्र बन चुका है, इसलिए यहां न्यायिक ढांचे का विस्तार समय की मांग है।

उनके सुझावों से यह संकेत मिलता है कि परिवार न्याय व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, मानवीय और बच्चों के अनुकूल बनाने की दिशा में बदलाव की सोच विकसित हो रही है।

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