गुजरात हाईकोर्ट ने पूर्व भारतीय क्रिकेटर किरण मोरे समेत चार को बड़ौदा क्रिकेट एसोसिएशन चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराया

गुजरात हाईकोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण आदेश देते हुए पूर्व भारतीय क्रिकेटर किरण मोरे सहित चार व्यक्तियों को बड़ौदा क्रिकेट एसोसिएशन (BCA) के चुनाव में पदाधिकारियों के रूप में चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया। अदालत ने चुनाव अधिकारी द्वारा उनकी नामांकन पत्रों को स्वीकार करने के निर्णय को निरस्त कर दिया।

न्यायमूर्ति निरल आर. मेहता ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया जिसमें कहा गया था कि संबंधित उम्मीदवार क्रिकेट प्रशासन में नौ वर्ष की अधिकतम संचयी अवधि पूरी कर चुके हैं, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार वे चुनाव लड़ने के पात्र नहीं रह जाते।

अदालत ने किरण मोरे, अमूल जिकार, अनंत इंदुलकर और अमर पेटीवाले के नामांकन पत्र स्वीकार करने तथा 22 फरवरी को जारी अंतिम उम्मीदवार सूची में उनके नाम शामिल करने की कार्रवाई को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित प्रत्याशी बीसीए में पदाधिकारी पद के चुनाव के लिए अयोग्यता प्राप्त कर चुके हैं। इसलिए उनके नामांकन स्वीकार करने और अंतिम सूची में शामिल करने की कार्रवाई को निरस्त किया जाता है।

साथ ही अदालत ने चुनाव अधिकारी को निर्देश दिया कि वह कानून तथा आदेश में की गई टिप्पणियों के अनुरूप चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाए और परिणाम घोषित करे।

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प्रतिवादियों के अनुरोध को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें इस आदेश के खिलाफ अपील दायर करने के लिए दो सप्ताह का समय भी दिया है।

इससे पहले 13 फरवरी को पारित एक अंतरिम आदेश में अदालत ने 15 फरवरी को प्रस्तावित मतदान प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति दी थी, लेकिन मतगणना और परिणाम घोषित करने पर अदालत की अनुमति के बिना रोक लगा दी थी।

यह याचिका वडोदरा के बीसीए सदस्य प्रदीपसिंह सोलंकी और रामचंद्र प्रजापति ने दायर की थी। उन्होंने बोर्ड ऑफ कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया (BCCI), बड़ौदा क्रिकेट एसोसिएशन, किरण मोरे और अन्य तीन व्यक्तियों को पक्षकार बनाया था।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि सुप्रीम कोर्ट ने 14 सितंबर 2022 को बीसीसीआई सुधारों से संबंधित मामले में स्पष्ट किया था कि यदि कोई व्यक्ति किसी राज्य क्रिकेट संघ में पदाधिकारी या काउंसलर के रूप में कुल मिलाकर नौ वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लेता है तो वह आगे चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि दो लगातार कार्यकाल के बाद तीन वर्ष का “कूलिंग-ऑफ” अवधि अनिवार्य होगी और क्रिकेट संघों के उपनियमों तथा मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन में कार्यकाल, पात्रता और अयोग्यता से जुड़े प्रावधान शामिल किए जाने चाहिए।

याचिकाकर्ताओं ने 20 जनवरी को चुनाव अधिकारी के समक्ष लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि संबंधित चारों प्रत्याशी नौ वर्ष की अधिकतम अवधि पूरी कर चुके हैं और इसलिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार चुनाव लड़ने के पात्र नहीं हैं।

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उन्होंने नामांकन पत्र खारिज करने और इस विषय पर सुनवाई की मांग की थी। हालांकि, उनकी आपत्तियों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया और उम्मीदवारों की अंतिम सूची प्रकाशित कर दी गई।

इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने 27 जनवरी को फिर से चुनाव अधिकारी के समक्ष अपनी आपत्ति दोहराई। जब इस पर भी कोई निर्णय नहीं हुआ तो उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।

मामले की सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों की ओर से यह दलील दी गई कि बीसीसीआई और राज्य स्तर के क्रिकेट संघों को एक समान नहीं माना जा सकता। उनका कहना था कि बीसीसीआई राष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट का संचालन करता है, जबकि राज्य या जिला क्रिकेट संघ सीमित क्षेत्र में खेल के संचालन से जुड़े होते हैं।

हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को स्वीकार करते हुए चुनाव अधिकारी द्वारा नामांकन स्वीकार करने की कार्रवाई को निरस्त कर दिया और संबंधित प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया।

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