मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार को पट्टाली मक्कल कच्ची (PMK) के भीतर चल रहे नेतृत्व विवाद से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए सिटी सिविल कोर्ट की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी। अदालत ने कहा कि पार्टी के वर्तमान महासचिव वडिवेल रवनन को इस मामले में पक्षकार बनाया जाना आवश्यक है और उनकी याचिका पर विचार किए बिना निचली अदालत आगे की कार्यवाही नहीं कर सकती।
न्यायमूर्ति टी. वी. तमिलसेल्वी ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें वडिवेल रवनन ने खुद को मामले में पक्षकार बनाने की अनुमति मांगी थी। इससे पहले सिटी सिविल कोर्ट ने उनकी यह मांग खारिज कर दी थी।
नेतृत्व विवाद से जुड़ा मामला
यह मामला पीएमके संस्थापक एस. रामदास द्वारा अपने बेटे और पार्टी नेता अंबुमणि रामदास के खिलाफ दायर सिविल मुकदमे से संबंधित है। इस मुकदमे में पार्टी के नेतृत्व और आंतरिक विवाद से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं।
रवनन का कहना था कि चूंकि वह वर्तमान में पार्टी के महासचिव हैं, इसलिए इस विवाद के निपटारे में उनकी भूमिका और पक्ष को सुना जाना जरूरी है। इसी आधार पर उन्होंने खुद को मामले में शामिल किए जाने की मांग की थी।
हाईकोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि वर्तमान स्थिति में वडिवेल रवनन पीएमके के महासचिव के पद पर हैं, इसलिए उन्हें इस मामले में आवश्यक पक्षकार माना जाना चाहिए।
अदालत ने कहा, “आज की तारीख में वह (वडिवेल रवनन) पीएमके के महासचिव के पद पर हैं। उनके दावे को देखते हुए वह इस कार्यवाही में आवश्यक पक्षकार हैं। उनकी पक्षकार बनाए जाने की याचिका पर विचार किए बिना ट्रायल कोर्ट अन्य आवेदनों पर आगे नहीं बढ़ सकता, अन्यथा इससे न्याय में चूक हो सकती है।”
अगली सुनवाई 10 अप्रैल को
हाईकोर्ट ने इस मामले में एस. रामदास, अंबुमणि रामदास और भारत निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी कर रवनन की याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा है।
मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

