केरल के प्रमुख एझवा समुदाय संगठन, श्री नारायण धर्म परिपालन (SNDP) योगम के नेतृत्व को एक बड़ा झटका लगा है। केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को संगठन के महासचिव वेल्लापल्ली नटेशन और तुषार वेल्लापल्ली सहित पूरे निदेशक मंडल (Board of Directors) और सभी पदाधिकारियों को अयोग्य घोषित कर दिया है।
जस्टिस टी.आर. रवि ने यह आदेश याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई करते हुए दिया। इन याचिकाओं में दिवंगत प्रोफेसर एम.के. सानू द्वारा दायर की गई याचिका भी शामिल थी, जिसमें संगठन के कामकाज में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था।
हाईकोर्ट का यह फैसला कंपनी अधिनियम (Companies Act) के तहत अनिवार्य वैधानिक आवश्यकताओं का पालन न करने के कारण आया है। चूंकि SNDP योगम एक कंपनी के रूप में पंजीकृत है, इसलिए यह विशिष्ट नियामक और फाइलिंग दायित्वों से बंधा हुआ है।
सुनवाई के दौरान यह पाया गया कि वैधानिक शर्तों का उल्लंघन केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं था, बल्कि यह पूरे संगठन के शासन ढांचे में व्याप्त था। इसके चलते, अदालत ने इस प्रणालीगत विफलता को सुधारने के लिए पूरे नेतृत्व को पद से हटाने का निर्णय लिया।
इस फैसले से केरल के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य की कई प्रभावशाली हस्तियां प्रभावित हुई हैं:
- वेल्लापल्ली नटेशन: संगठन के महासचिव, जो दशकों से इसका नेतृत्व कर रहे थे।
- तुषार वेल्लापल्ली: बोर्ड के प्रमुख सदस्य और BDJS पार्टी के नेता।
- संपूर्ण निदेशक मंडल: वर्तमान में बोर्ड में सेवा दे रहे प्रत्येक सदस्य को उनके पद से हटा दिया गया है।
SNDP योगम केरल के सबसे शक्तिशाली सामुदायिक संगठनों में से एक है, जिसकी स्थापना समाज सुधारक श्री नारायण गुरु के सिद्धांतों पर की गई थी। संगठन के 100 साल से अधिक के इतिहास में यह पहली बार है जब पूरे नेतृत्व को इस तरह अयोग्य ठहराया गया है।
अदालत ने अयोग्यता का आदेश तो सुना दिया है, लेकिन अब सभी की नजरें विस्तृत लिखित आदेश पर टिकी हैं। इससे स्पष्ट होगा कि संगठन में नए चुनाव कब होंगे या क्या प्रशासन चलाने के लिए किसी अंतरिम प्रशासक की नियुक्ति की जाएगी।

