इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ को मंगलवार को बताया गया कि प्रस्तावित ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के तहत ला मार्टिनियर कॉलेज की जमीन पर सड़क या फ्लाईओवर निर्माण का काम फिलहाल नहीं किया जाएगा। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने अगली तारीख 13 मार्च तय की और लखनऊ के जिलाधिकारी को उस दिन भी अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ के समक्ष यह मामला ला मार्टिनियर कॉलेज द्वारा दायर याचिका में उठाया गया है। कॉलेज ने आरोप लगाया है कि उसकी स्वामित्व वाली जमीन पर सरकारी परियोजना के तहत निर्माण की योजना बनाई जा रही है।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि इस विवादित भूमि पर लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) फिलहाल कोई निर्माण कार्य शुरू नहीं करेगा। साथ ही यह भी जानकारी दी गई कि ला मार्टिनियर चैरिटीज़ के ट्रस्टियों की बैठक बुधवार को प्रस्तावित है, जिसमें इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी।
अदालत के पूर्व आदेश के अनुपालन में लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए। अदालत ने उन्हें अगली सुनवाई की तारीख पर भी उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
कॉलेज की याचिका के अनुसार, गणेशगंज स्टेशन क्षेत्र स्थित कोठी मार्टिन साहिब की जमीन पर सरकार ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के तहत सड़क और फ्लाईओवर बनाने की योजना बना रही है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह जमीन संस्थान की है और बिना उसकी सहमति के निर्माण की तैयारी की जा रही थी।
याचिका में यह भी कहा गया है कि इस जमीन के संबंध में न तो एलडीए, न जिला प्रशासन और न ही राज्य सरकार ने अब तक कोई विधिक भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू की है।
इससे पहले 27 फरवरी को हाईकोर्ट ने विवादित जमीन का सीमांकन और माप कराने का आदेश दिया था। हालांकि हाल ही की सुनवाई में अदालत ने पाया कि यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। इसी कारण अदालत ने जिलाधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था।
ला मार्टिनियर कॉलेज लखनऊ की स्थापना 1845 में फ्रांसीसी साहसी और परोपकारी क्लॉड मार्टिन की वसीयत के आधार पर हुई थी। लखनऊ मार्टिनियर चैरिटीज़ द्वारा संचालित यह संस्थान देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है और अपने लंबे शैक्षणिक इतिहास के लिए जाना जाता है।

