सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को लोकगायिका नेहा सिंह राठौर को पिछले वर्ष जम्मू-कश्मीर के पहल्गाम में हुए आतंकी हमले पर की गई सोशल मीडिया टिप्पणी से जुड़े मामले में अग्रिम जमानत दे दी। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी। अदालत ने यह ध्यान में रखते हुए राहत दी कि राठौर जांच एजेंसियों के समक्ष पेश होकर अपना बयान दर्ज करा चुकी हैं।
न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदूरकर की पीठ ने राठौर को अग्रिम जमानत देते हुए उन्हें जांच में पूरा सहयोग जारी रखने का निर्देश दिया।
राठौर ने सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ के 5 दिसंबर के आदेश को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि वह जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं कर रही थीं, जबकि इससे पहले एक अन्य पीठ उनकी एफआईआर रद्द करने की याचिका खारिज करते समय उन्हें जांच में सहयोग करने का निर्देश दे चुकी थी।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 7 जनवरी को राठौर को अंतरिम राहत देते हुए गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया था। उस समय अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी करते हुए कहा था कि राठौर के खिलाफ कोई कठोर कदम न उठाया जाए। साथ ही उन्हें जांच अधिकारी के सामने उपस्थित होकर जांच में सहयोग करने को कहा गया था।
राठौर के खिलाफ यह मामला 27 अप्रैल को लखनऊ के हजरतगंज थाने में दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता अभय प्रताप सिंह ने आरोप लगाया था कि पहल्गाम आतंकी हमले से जुड़े उनके सोशल मीडिया पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी को निशाना बनाया गया था।
एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया कि उनके बयान से एक विशेष धार्मिक समुदाय को निशाना बनाया गया और इससे देश की एकता को नुकसान पहुंचने की आशंका पैदा हुई। शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि राठौर ने धार्मिक आधार पर एक समुदाय को दूसरे समुदाय के खिलाफ भड़काने का प्रयास किया।
अपनी याचिका में राठौर ने कहा कि उन्हें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत गलत तरीके से फंसाया गया है। इनमें साम्प्रदायिक वैमनस्य फैलाने, सार्वजनिक शांति भंग करने और भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने से संबंधित आरोप शामिल हैं। इसके अलावा उन पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत भी आरोप लगाए गए हैं।
मामले की जांच फिलहाल जारी है।

