रिश्वत लेना ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ की श्रेणी में आता है: बॉम्बे हाई कोर्ट ने वीवीसीएमसी के पूर्व अधिकारी को राहत देने से किया इनकार

बॉम्बे हाई कोर्ट ने वसई विरार सिटी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (VVCMC) के पूर्व अधिकारी वाई शिवा रेड्डी को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति रिश्वत लेता है तो वह ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ प्राप्त करता है। इसी आधार पर अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।

मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की खंडपीठ ने सोमवार को रेड्डी की याचिका खारिज कर दी। रेड्डी, जो वीवीसीएमसी के टाउन प्लानिंग विभाग में डिप्टी डायरेक्टर थे, अगस्त 2025 में गिरफ्तारी के बाद से न्यायिक हिरासत में हैं।

रेड्डी ने अपनी याचिका में कहा था कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मूल अपराध (प्रेडिकेट ऑफेंस) ईडी द्वारा उनके आवासों पर तलाशी के बाद दर्ज किया गया था। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि उनके घर से बरामद नकदी और आभूषण को कथित अपराध की आय से जोड़ने वाला कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है।

हालांकि, हाई कोर्ट ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) में “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” की परिभाषा व्यापक है और इसमें वह संपत्ति भी शामिल है जो किसी आपराधिक गतिविधि के कारण प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त हुई हो। अदालत ने स्पष्ट किया कि रिश्वत लेना भी ऐसी ही आय की श्रेणी में आता है।

ईडी के आरोपों के अनुसार, वर्ष 2019 से 2023 के बीच रेड्डी सहित कुछ अधिकारियों ने बिल्डरों को अवैध निर्माण की अनुमति दी। जांच एजेंसी का कहना है कि फर्जी अनुमतियों और गढ़े गए दस्तावेजों के आधार पर कुल 41 इमारतों का निर्माण कराया गया, जबकि संबंधित भूमि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और डंपिंग ग्राउंड के लिए आरक्षित थी।

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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जांच के दौरान बरामद बेहिसाब नकदी, आभूषण और अन्य दस्तावेजों के साथ गवाहों के बयान प्रथमदृष्टया यह संकेत देते हैं कि ईडी के पास रेड्डी की संलिप्तता मानने के लिए पर्याप्त आधार था।

जांच एजेंसी का यह भी आरोप है कि रेड्डी ने कथित तौर पर रिश्वत के पैसे से आभूषण और अन्य महंगी वस्तुएं खरीदीं। अदालत ने गिरफ्तारी मेमो का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें आरोपी की भूमिका से संबंधित ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य का उल्लेख किया गया है।

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ईडी ने 23 जून 2025 को रेड्डी के आवासों पर छापेमारी की थी, जिसमें ₹8.23 करोड़ की बेहिसाब नकदी और लगभग ₹23.28 करोड़ मूल्य के आभूषण बरामद किए गए थे। इसके बाद एजेंसी ने स्थानीय पुलिस को जानकारी दी, जिसके आधार पर 1 अगस्त 2025 को एफआईआर दर्ज हुई।

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” की राशि का आकलन बदल सकता है।

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अंततः अदालत ने माना कि रेड्डी की गिरफ्तारी 13 अगस्त 2025 को विधि के अनुरूप की गई थी और इसमें हस्तक्षेप करने का कोई प्रथमदृष्टया आधार नहीं बनता। इसलिए उनकी गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने या बाद के रिमांड आदेशों को रद्द करने का कोई कारण नहीं पाया गया।

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