कर्नाटक में दो जिलों से बाहर कंबाला आयोजित करने पर रोक लगाने की मांग खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने PETA की याचिका ठुकराई

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों के बाहर पारंपरिक भैंस दौड़ कंबाला आयोजित करने पर रोक लगाने की मांग की गई थी। अदालत ने कहा कि यदि राज्य अपनी सांस्कृतिक परंपरा को अन्य क्षेत्रों में भी प्रदर्शित करना चाहता है तो इसे केवल एक सीमित क्षेत्र तक क्यों बांधा जाए।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) इंडिया की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में 14 नवंबर को दिए गए कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें राज्य सरकार को दक्षिण कन्नड़ और उडुपी के अलावा अन्य स्थानों को कंबाला आयोजन के लिए अधिसूचित करने से रोकने की मांग अस्वीकार कर दी गई थी।

सुनवाई के दौरान पीठ ने सवाल उठाया कि यदि राज्य सरकार कर्नाटक के अन्य हिस्सों में भी इस परंपरा को प्रदर्शित करना चाहती है तो इसमें आपत्ति क्या है। न्यायमूर्ति मेहता ने टिप्पणी की कि लोगों को राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में भी इस सांस्कृतिक परंपरा से परिचित होने का अवसर मिलना चाहिए और इसे किसी एक क्षेत्र तक सीमित रखने का कोई ठोस कारण नहीं दिखता।

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PETA की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि कंबाला से जुड़े एक अन्य मामले में राज्य सरकार ने पहले दायर किए गए हलफनामे में कहा था कि यह खेल मुख्य रूप से कर्नाटक के दो तटीय जिलों—दक्षिण कन्नड़ और उडुपी—की पारंपरिक संस्कृति से जुड़ा है। वकील ने यह भी दलील दी कि अब इसे बेंगलुरु में आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है, जबकि राजधानी शहर का इस परंपरा से कोई सांस्कृतिक संबंध नहीं है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और याचिका को खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि भविष्य में कुछ सवाल PETA से भी पूछे जा सकते हैं।

कंबाला कर्नाटक की एक पारंपरिक भैंस दौड़ है, जो आमतौर पर नवंबर से मार्च के बीच आयोजित होती है। इस प्रतियोगिता में दो भैंसों को हल से बांधकर एक व्यक्ति द्वारा नियंत्रित किया जाता है और उन्हें कीचड़ से भरे समानांतर ट्रैक पर दौड़ाया जाता है। सबसे तेज दौड़ पूरी करने वाली टीम को विजेता घोषित किया जाता है।

इससे पहले मई 2023 में सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक द्वारा पारित संशोधन कानूनों की वैधता को बरकरार रखा था, जिनके माध्यम से जलीकट्टू, बैलगाड़ी दौड़ और कंबाला जैसे पारंपरिक खेलों को अनुमति दी गई थी। अदालत ने इन कानूनों को वैध माना था।

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जलीकट्टू, जिसे एरुथाझुवुथल भी कहा जाता है, तमिलनाडु में पोंगल त्योहार के दौरान खेले जाने वाला पारंपरिक बैल-तामिंग खेल है।

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