2017 सड़क हादसे में सब्ज़ी विक्रेता की मौत: ठाणे MACT ने परिवार को ₹31.65 लाख मुआवज़ा देने का आदेश

मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT), ठाणे ने वर्ष 2017 में सड़क दुर्घटना में मारे गए एक सब्ज़ी विक्रेता के परिवार को ₹31.65 लाख का मुआवज़ा देने का आदेश दिया है। अधिकरण ने संबंधित मोटर ट्रेलर के बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह पहले यह राशि दावेदारों को अदा करे और बाद में वाहन मालिक से इसकी वसूली करे।

यह आदेश MACT के सदस्य आर. वी. मोहिते ने 7 मार्च को पारित किया। मामला 28 वर्षीय रिज़वान असगर अली देवजानी की मौत से जुड़ा था, जो दुर्घटना के समय सब्ज़ी का कारोबार करते थे।

दावेदारों के अनुसार 22 सितंबर 2017 को देवजानी अपनी मोटरसाइकिल से नवी मुंबई के वाशी मार्केट जा रहे थे। शिबली नगर के पास एक मोटर ट्रेलर ने ओवरटेक करने की कोशिश करते हुए तेज रफ्तार में पीछे से उनकी बाइक को टक्कर मार दी।

टक्कर के बाद देवजानी सड़क पर गिर गए और उसी समय गुजर रहे एक कंटेनर के पहियों के नीचे आ गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इस मामले में मृतक की पत्नी, पांच बच्चे और माता-पिता ने मुआवज़े का दावा दाखिल किया था।

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मामले की सुनवाई के दौरान ट्रेलर के मालिक, जो एक निजी लॉजिस्टिक्स कंपनी है, अधिकरण के सामने पेश नहीं हुए। इसके कारण अधिकरण ने उनके खिलाफ एकतरफा (ex parte) कार्यवाही करते हुए मामला तय किया।

बीमा कंपनी ने दावा करते हुए कहा कि दावेदारों द्वारा प्रस्तुत बीमा पॉलिसी नकली और मनगढ़ंत है तथा संबंधित वाहन के लिए कोई प्रीमियम जमा नहीं किया गया था।

हालांकि अधिकरण ने पाया कि भले ही प्रीमियम जमा न हुआ हो, लेकिन वाहन के लिए कवर नोट के साथ पॉलिसी जारी की गई थी। इस आधार पर अधिकरण ने माना कि मृतक एक संरक्षित ‘थर्ड पार्टी’ के रूप में आता है।

विभिन्न न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए अधिकरण ने कहा कि यदि बीमा कंपनी पॉलिसी शर्तों के उल्लंघन को साबित भी कर दे, तब भी उसे पहले तीसरे पक्ष के पक्ष में दिए गए मुआवज़े का भुगतान करना होगा और बाद में वाहन मालिक या चालक से इसकी वसूली करने का अधिकार रहेगा।

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अधिकरण ने मृतक की मासिक आय ₹12,000 मानते हुए कुल ₹31.65 लाख का मुआवज़ा निर्धारित किया। इस राशि पर दिसंबर 2017 में याचिका दायर होने की तारीख से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।

साथ ही, अधिकरण ने यह भी निर्देश दिया कि मुआवज़े की राशि का एक हिस्सा मृतक की पत्नी और बच्चों के नाम पर फिक्स्ड डिपॉजिट में रखा जाए, ताकि उनके भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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