सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नितीश कटारा हत्याकांड में दोषी विकास यादव को होली के दौरान परिवार के साथ समय बिताने के लिए 7 मार्च तक फर्लो पर रिहा करने की अनुमति दे दी। वह बिना रिमिशन के 25 साल की सजा काट रहा है और अब तक 23 साल जेल में बिता चुका है।
न्यायमूर्ति एमएम सुन्दरेश और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह राहत देते हुए कहा कि फर्लो केवल अस्थायी रिहाई है और इससे सजा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अदालत ने मामले के गुण-दोष में जाए बिना याचिका स्वीकार की।
सुनवाई के दौरान पीठ ने शिकायतकर्ता पक्ष की आपत्तियों को खारिज कर दिया। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि इस तरह की राहत कई बार दोषी के सुधार की प्रक्रिया में सहायक हो सकती है।
इससे पहले 11 फरवरी को दिल्ली हाई कोर्ट ने विकास यादव की 21 दिन की फर्लो याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि वह “गंभीर अपराध” में दोषी ठहराया गया है और दिल्ली प्रिजन रूल्स, 2018 के तहत फर्लो के लिए “वैधानिक रूप से अयोग्य” है। साथ ही जेल प्रशासन द्वारा 29 अक्टूबर 2025 को उसकी फर्लो अर्जी खारिज करने में कोई अवैधता या मनमानी नहीं पाई गई थी।
फर्लो एक अस्थायी रिहाई होती है, जो लंबे समय से सजा काट रहे कैदियों को सीमित अवधि के लिए दी जाती है। इससे सजा में कोई कमी या निलंबन नहीं होता।
विकास यादव, उत्तर प्रदेश के नेता डीपी यादव का पुत्र है। उसे अपने चचेरे भाई विशाल यादव के साथ नितीश कटारा के अपहरण और हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था। 16-17 फरवरी 2002 की रात एक शादी समारोह से कटारा का अपहरण कर उनकी हत्या कर दी गई थी। अभियोजन के अनुसार यह अपराध इसलिए किया गया क्योंकि कटारा का विकास यादव की बहन भारती यादव से संबंध था और दोनों अलग जातियों से थे।
सुप्रीम कोर्ट ने 3 अक्टूबर 2016 को विकास यादव और विशाल यादव को बिना रिमिशन के 25 साल की सजा सुनाई थी, जबकि सह-दोषी सुखदेव यादव को 20 साल की सजा दी गई थी।
अदालत के ताजा आदेश के अनुसार विकास यादव को तय अवधि के बाद 7 मार्च को वापस जेल में आत्मसमर्पण करना होगा।

