सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को निर्देश दिया कि पुलिस थानों में सीसीटीवी व्यवस्था के मानकीकरण और केंद्रीकृत डैशबोर्ड के निर्माण के लिए 14 मार्च को होने वाली बैठक में भाग लें।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश उस समय पारित किया जब न्यायालय के अमीकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने बताया कि 29 जनवरी के आदेश के अनुपालन में 21 फरवरी को बैठक आयोजित की गई थी, लेकिन केंद्र, दिल्ली सरकार तथा कुछ अन्य राज्य उसमें शामिल नहीं हुए, जिसके कारण वह अपनी रिपोर्ट दाखिल नहीं कर सके।
पीठ ने दर्ज किया कि भारत संघ की ओर से उपस्थित वकील ने अनुपस्थिति के लिए खेद व्यक्त किया और कहा कि यह संचार की कमी के कारण हुआ तथा अगली बैठक में पूर्ण सहयोग दिया जाएगा।
पीठ ने आदेश में कहा, “अमीकस ने अगली बैठक के लिए 14 मार्च 2026 की तिथि सुझाई है। पूर्व में दिए गए निर्देशानुसार बैठक 14 मार्च 2026 को आयोजित की जाए।”
मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को निर्धारित की गई है।
यह मामला पुलिस थानों में कार्यशील सीसीटीवी कैमरों की कमी संबंधी एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए शुरू की गई जनहित याचिका से जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने को मानवाधिकार उल्लंघनों की रोकथाम के लिए अनिवार्य किया था। वर्ष 2018 में सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी लगाने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद दिसंबर 2020 में अदालत ने सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय और राष्ट्रीय जांच एजेंसी सहित जांच एजेंसियों के कार्यालयों में भी सीसीटीवी और रिकॉर्डिंग उपकरण लगाने का आदेश दिया था।
अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि पुलिस थानों के सभी प्रवेश-निकास द्वार, मुख्य गेट, लॉक-अप, गलियारे, लॉबी, रिसेप्शन तथा लॉक-अप के बाहर के क्षेत्र सीसीटीवी कवरेज में हों ताकि कोई हिस्सा बिना निगरानी के न रहे।
साथ ही यह भी अनिवार्य किया गया था कि सीसीटीवी प्रणाली में नाइट विजन, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा हो और कम से कम एक वर्ष तक डेटा सुरक्षित रखने की क्षमता हो।

