केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को कोट्टायम जिले स्थित वैकोम महादेव मंदिर की गोशाला में मवेशियों की दयनीय स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) उनके कल्याण को “बहुत कम प्राथमिकता” दे रहा है। अदालत ने यह भी कहा कि कुछ गायों की भूख से मौत होना “चौंकाने वाला और परेशान करने वाला” है।
न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी और न्यायमूर्ति के. वी. जयकुमार की खंडपीठ ने गोशाला और वहां रखे मवेशियों के रखरखाव के लिए कई निर्देश जारी किए।
याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत तस्वीरों का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा कि वे उन पशुओं की “दुर्दशा” दिखाती हैं जिन्हें भक्तों ने ‘नडयिरुथल’ अनुष्ठान के तहत मंदिर में समर्पित किया था।
पीठ ने कहा:
“त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड इन पशुओं के कल्याण को बहुत कम प्राथमिकता दे रहा है। यह चौंकाने वाला और परेशान करने वाला है कि कुछ गायों की भूख से मौत हो गई और देवस्वोम में उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है।”
हाईकोर्ट ने TDB को निर्देश दिया कि वह:
- गोशाला प्रबंधन के लिए वैकोम समूह के एक प्रशासनिक अधिकारी को नामित करे
- आवश्यक मरम्मत कार्य कराए
- सांड और गायों के लिए अलग-अलग भोजन व्यवस्था सुनिश्चित करे
- स्वच्छता, जलनिकासी और वेंटिलेशन की उचित व्यवस्था करे
- मवेशियों के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध कराए
- एक पूर्णकालिक गोपालक नियुक्त करे
- देवस्वोम के अधीन गोशालाओं के संरक्षण हेतु अलग बैंक खाता खोले
अदालत ने इन निर्देशों को तीन महीने के भीतर लागू करने का आदेश देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।
साथ ही, पीठ ने देवस्वोम बोर्ड को भगवान शिव के मंदिरों के आसपास गोशालाओं की स्थापना और रखरखाव के लिए एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार करने की अनुमति दी, जिसके लिए बोर्ड अपने संसाधनों, भक्तों के अलग खाते में दिए गए दान तथा कॉर्पोरेट या अन्य प्रायोजन का उपयोग कर सकता है।
यह मामला कोच्चि निवासी एम. मुरलीधरन की याचिका पर सामने आया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि दो सांड और छह गायों को अत्यंत खराब स्थिति में रखा गया है और एक अनुभवी पूर्णकालिक गोपालक की तत्काल नियुक्ति की मांग की गई थी।
सुनवाई के दौरान सहायक देवस्वोम आयुक्त ने अदालत को बताया कि चारे का शुल्क प्रति पशु ₹150 से बढ़ाकर ₹250 कर दिया गया है और गोपालक की नियुक्ति पर निर्णय लिया जाएगा।
बोर्ड ने यह भी बताया कि वैकोम गोशाला में एक सांड प्रतीकात्मक रूप से रखा जाएगा और बाकी पशुओं को एत्तुमानूर स्थित कालीकावु बुल प्रोटेक्शन सेंटर स्थानांतरित किया जाएगा, जहां मरम्मत कार्य तीन महीने में पूरा कर लिया जाएगा।
याचिका का निस्तारण करते हुए हाईकोर्ट ने त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड को 25 मई तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

