सहयोग, धैर्य और ईमानदारी से बनती है सफल कानूनी करियर: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने रविवार को कानून के छात्रों से अपने करियर को सहयोग, धैर्य और पेशेवर ईमानदारी के आधार पर विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा कि कानूनी पेशे में स्थायी सफलता अल्पकालिक उपलब्धियों से नहीं बल्कि दीर्घकालिक प्रतिबद्धता से मिलती है।

हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के नवें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि स्नातक छात्र एक ऐसे पेशेवर सफर में प्रवेश कर रहे हैं जो अनिश्चितताओं और जिम्मेदारियों से भरा है, जहां दूसरों के साथ काम करने की क्षमता और नैतिक आचरण उनकी प्रगति तय करेगा।

स्नातकों, शिक्षकों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जहां विधि शिक्षा में परीक्षाओं, रैंकिंग और प्लेसमेंट के माध्यम से प्रतिस्पर्धा पर जोर दिया जाता है, वहीं कानूनी पेशा सहयोग से चलता है।
“विधि शिक्षा में भले ही प्रतिस्पर्धा पर जोर दिया जाता है, लेकिन न्याय व्यवस्था सहयोग से ही संचालित होती है।”

उन्होंने न्याय प्रणाली की तुलना कई सहायक नदियों से बनने वाली एक नदी से करते हुए कहा कि न्याय का संचालन जूनियर्स, सीनियर्स, सहकर्मियों और यहां तक कि विपक्षी वकीलों के सामूहिक प्रयास का परिणाम होता है।

मुख्य न्यायाधीश ने छात्रों को अपने साथियों के साथ सम्मान और निष्पक्षता का व्यवहार करने की सलाह दी और कहा कि आज के सहपाठी भविष्य में सहयोगी, अदालत में प्रतिद्वंद्वी और संभवतः न्यायपालिका के सदस्य बन सकते हैं। उन्होंने अपने वकालत के शुरुआती दौर का एक अनुभव साझा करते हुए बताया कि बिना किसी स्वार्थ के एक सहकर्मी की सहायता करने से दीर्घकालिक पेशेवर विश्वास और सहयोग विकसित हुआ।

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उन्होंने कहा, “ऐसे सद्भावपूर्ण कार्य न केवल व्यक्तिगत करियर को मजबूत करते हैं बल्कि कानूनी पेशे की विश्वसनीयता को भी बढ़ाते हैं,” और विधि क्षेत्र को एक “लंबी दौड़” बताया जिसमें पहचान और अधिकार धीरे-धीरे विकसित होते हैं।

उन्होंने कहा कि वकालत के शुरुआती वर्ष धीमे लग सकते हैं, लेकिन यही समय अदालत की कार्यप्रणाली, विधिक तर्क और मुवक्किल से संवाद की समझ विकसित करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने छात्रों से अल्पकालिक मानकों से प्रगति का आकलन न करने और निरंतरता, परिश्रम तथा ईमानदारी को अपनाने का आग्रह किया।

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करियर निर्माण की तुलना भवन निर्माण से करते हुए उन्होंने कहा कि अदृश्य नींव ही भविष्य की मजबूती तय करती है। उन्होंने स्नातकों से एक-दूसरे का सहयोग करने, पेशेवर समुदाय से जुड़े रहने और जीवन में संतुलन बनाए रखने की अपील की।

इस अवसर पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से भी भेंट की। मुख्यमंत्री ने उन्हें पारंपरिक ‘गमछा’, बस्तर दशहरा पर आधारित कॉफी टेबल बुक तथा भगवान राम और माता शबरी की घंटा धातु से बनी प्रतिमा भेंट की।

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