केरल हाईकोर्ट ने फिल्म “द केरल स्टोरी 2 – गोज़ बियॉन्ड” को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) द्वारा दिए गए प्रमाणपत्र को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार, CBFC और फिल्म के निर्माताओं को नोटिस जारी किया है।
न्यायमूर्ति बेच्चू कुरियन थॉमस की एकल पीठ ने कन्नूर निवासी श्रीदेव नंबूदिरि द्वारा दायर रिट याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। मामले को आगे की सुनवाई के लिए 24 फरवरी को सूचीबद्ध किया गया है। फिल्म 27 फरवरी को रिलीज होने वाली है।
याचिका में कहा गया है कि CBFC ने सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 के तहत निर्धारित वैधानिक मानकों का पालन किए बिना फिल्म को प्रमाणन प्रदान किया है।
याचिकाकर्ता के अनुसार, फिल्म के टीज़र और ट्रेलर में विभिन्न राज्यों की महिलाओं से जुड़ी कथाएँ दिखाई गई हैं, लेकिन शीर्षक “द केरल स्टोरी” के माध्यम से आतंकवाद, जबरन धर्मांतरण और जनसांख्यिकीय साजिश के आरोपों को विशेष रूप से केरल राज्य से जोड़ा गया है।
याचिका में कहा गया है कि ऐसा चित्रण पूरे क्षेत्रीय समुदाय को कलंकित कर सकता है, सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है और सांप्रदायिक व क्षेत्रीय असंतोष उत्पन्न कर सकता है।
याचिकाकर्ता ने फिल्म के पहले भाग से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया है और कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में उठे मुद्दों के बावजूद CBFC ने सीक्वल के प्रभाव का पर्याप्त परीक्षण नहीं किया, जबकि धारा 5B के तहत सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता और नैतिकता पर प्रभाव का आकलन आवश्यक है।
यह भी आरोप लगाया गया है कि टीज़र और ट्रेलर के अंतिम वक्तव्य प्रतिशोधात्मक कार्रवाई का आह्वान करते प्रतीत होते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था की आशंका उत्पन्न होती है।
याचिका में निम्नलिखित निर्देशों की मांग की गई है:
- CBFC द्वारा दिए गए प्रमाणपत्र को रद्द किया जाए
- प्रमाणन पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया जाए
- याचिका के अंतिम निपटारे तक फिल्म की रिलीज पर रोक लगाई जाए
- शीर्षक पर पुनर्विचार तथा उपयुक्त डिस्क्लेमर सहित आवश्यक संशोधन करने का निर्देश दिया जाए
याचिकाकर्ता ने अनुच्छेद 14, 19(2) और 21 के उल्लंघन का भी हवाला दिया है।
हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए मामले को 24 फरवरी के लिए सूचीबद्ध किया है।
इस चरण पर कोई अंतरिम राहत नहीं दी गई है।

