दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को उन्नाव बलात्कार पीड़िता द्वारा दायर उस अपील पर कुलदीप सेंगर और अन्य दोषियों से जवाब मांगा, जिसमें उनके 10 वर्ष के कारावास को बढ़ाकर मृत्युदंड करने की मांग की गई है।
न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर दुदेजा की पीठ ने 2020 के ट्रायल कोर्ट के निर्णय के खिलाफ लगभग 1,940 दिनों की देरी से दायर अपील को स्वीकार करने हेतु दायर विलंब माफी आवेदन पर नोटिस जारी किया। पीठ ने कहा कि पहले अपील की ग्राह्यता (maintainability) पर निर्णय किया जाएगा।
अपील में पीड़िता ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दोषियों को धारा 304 आईपीसी (गैर इरादतन हत्या) के तहत दोषी ठहराने के निष्कर्ष को संशोधित कर धारा 302 आईपीसी (हत्या) के तहत दोषी ठहराने और मृत्युदंड देने की मांग की है।
सीबीआई के वकील ने अदालत को बताया कि इस अपील में मुख्य प्रतिवादी सेंगर और अन्य दोषी हैं और एजेंसी को इस पर कोई आपत्ति नहीं है।
हाईकोर्ट ने नोट किया कि 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने सेंगर द्वारा कस्टोडियल डेथ मामले में अपनी दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली अपील की आउट-ऑफ-टर्न सुनवाई कर तीन महीने के भीतर निर्णय करने का निर्देश दिया था। साथ ही पीड़िता की सज़ा बढ़ाने की अपील पर भी विचार करने को कहा था।
सेंगर को 20 दिसंबर 2019 को नाबालिग पीड़िता से बलात्कार के मामले में दोषी ठहराते हुए शेष जीवन के लिए कारावास की सज़ा सुनाई गई थी।
कस्टोडियल डेथ मामले में पीड़िता के पिता को कथित तौर पर आरोपियों के इशारे पर आर्म्स एक्ट में गिरफ्तार किया गया था और 9 अप्रैल 2018 को पुलिस हिरासत में उनकी मौत हो गई थी।
13 मार्च 2020 को ट्रायल कोर्ट ने सेंगर, उसके भाई जयदीप सेंगर उर्फ अतुल सिंह सहित अन्य को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष का कठोर कारावास और ₹10 लाख का जुर्माना लगाया था। अदालत ने कहा था कि परिवार के “एकमात्र कमाने वाले सदस्य” की हत्या में “कोई नरमी” नहीं बरती जा सकती, लेकिन हत्या का इरादा सिद्ध न होने के कारण धारा 302 के बजाय धारा 304 आईपीसी के तहत अधिकतम सज़ा दी गई।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 1 अगस्त 2019 के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित किया गया था।
अब हाईकोर्ट पहले विलंब माफी और अपील की ग्राह्यता पर निर्णय करेगा, उसके बाद सज़ा बढ़ाने के मुद्दे पर सुनवाई आगे बढ़ेगी।

