नेशनल हेराल्ड मामला: ट्रायल कोर्ट द्वारा संज्ञान से इनकार के खिलाफ ईडी की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में 9 मार्च को सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को नेशनल हेराल्ड से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी एवं अन्य के खिलाफ दायर ईडी की अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लेने से ट्रायल कोर्ट के इनकार को चुनौती देने वाली याचिका पर 9 मार्च की तारीख तय की।

न्यायमूर्ति स्वर्णकांत शर्मा ने गांधी परिवार सहित अन्य प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया।

प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अतिरिक्त समय दिए जाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि नोटिस दो महीने पहले ही जारी हो चुका था। उन्होंने इस मुद्दे को “कानून का साफ प्रश्न” बताते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट के निष्कर्ष अन्य मामलों में बाधा बन रहे हैं और संज्ञान लेने से इनकार करने के कारण “स्पष्ट रूप से त्रुटिपूर्ण” हैं।

16 दिसंबर 2025 को ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत ईडी की शिकायत पर संज्ञान लेना “कानूनन संभव नहीं” है, क्योंकि यह किसी अनुसूचित अपराध से संबंधित एफआईआर पर आधारित नहीं थी।
अदालत ने कहा था कि ईडी की जांच भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर निजी शिकायत से उत्पन्न हुई थी और 2014 में समन आदेश पारित होने के बावजूद सीबीआई ने संबंधित अनुसूचित अपराध में एफआईआर दर्ज नहीं की।

हाईकोर्ट ने 22 दिसंबर को ईडी की मुख्य याचिका और ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग वाली अर्जी पर नोटिस जारी किया था।

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सोनिया गांधी और राहुल गांधी के अलावा सुमन दुबे, सैम पित्रोदा, यंग इंडियन, डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड और सुनील भंडारी को नोटिस जारी किया गया था। ईडी ने दिवंगत कांग्रेस नेताओं मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस का भी नाम आरोपों में शामिल किया है।

ईडी का आरोप है कि एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL), जो नेशनल हेराल्ड प्रकाशित करता है, की लगभग ₹2000 करोड़ की संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए साजिश रची गई। एजेंसी के अनुसार, यंग इंडियन में गांधी परिवार की कथित 76 प्रतिशत हिस्सेदारी थी और ₹90 करोड़ के ऋण के बदले AJL की संपत्तियां “धोखाधड़ी से” अपने कब्जे में ली गईं।

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ईडी ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का आदेश केवल इस आधार पर एक वर्ग के कथित धन शोधन आरोपियों को राहत देता है कि अनुसूचित अपराध निजी शिकायत से उत्पन्न हुआ था, न कि एफआईआर से।
एजेंसी ने तर्क दिया कि जब सक्षम अदालत निजी शिकायत पर संज्ञान ले चुकी है, तो वह “सिर्फ एफआईआर से भी उच्च स्तर” पर होती है और PMLA की कार्यवाही के लिए पर्याप्त है।

ईडी ने यह भी कहा कि संज्ञान के चरण पर अदालत का दायरा सीमित होता है और उसे केवल यह देखना होता है कि शिकायत में प्रक्रिया शुरू करने के लिए पर्याप्त आधार है या नहीं।

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मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च को होगी, जब हाईकोर्ट प्रतिवादियों के जवाब और ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ ईडी की चुनौती पर विचार करेगा।

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