उन्नाव अभिरक्षा मृत्यु मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने जयदीप सेंगर की अंतरिम जमानत 20 फरवरी तक बढ़ाई, CBI से मांगी विस्तृत चिकित्सीय सत्यापन रिपोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की अभिरक्षा मृत्यु मामले में दोषी ठहराए गए जयदीप सेंगर की अंतरिम जमानत 20 फरवरी तक बढ़ा दी और CBI को उसके कैंसर संबंधी दावे पर विस्तृत सत्यापन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

जयदीप सेंगर, जिसे ट्रायल कोर्ट ने 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी, ने तीन महीने के लिए अंतरिम जमानत बढ़ाने की मांग की थी। उसने कहा कि वह स्टेज-IV ओरल कैंसर से पीड़ित है और उसे लगातार विशेषज्ञ चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता है।

CBI की ओर से पेश वकील ने जमानत बढ़ाने का विरोध करते हुए कहा कि यह विस्तार देने योग्य मामला नहीं है। एजेंसी ने दलील दी कि जयदीप सेंगर द्वारा प्रस्तुत चिकित्सा पर्ची “जेनुइन नहीं बल्कि बनावटी” है और यदि उसे जमानत बढ़ानी थी तो उसे समय रहते अदालत का रुख करना चाहिए था।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि CBI ने अब तक कोई सत्यापन रिपोर्ट दाखिल नहीं की है और एजेंसी को विस्तृत चिकित्सीय रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।

अदालत ने कहा,
“आपको बताना होगा कि क्या यह व्यक्ति इतनी गंभीर अवस्था में है कि उसे जमानत बढ़ाने का लाभ मिलना चाहिए। यदि नहीं, तो स्पष्ट रिपोर्ट दीजिए… यह भी बताइए कि बीमारी वास्तविक है या नहीं, और क्या यह व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार है या नहीं।”

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विस्तृत रिपोर्ट दाखिल होने तक अदालत ने अंतरिम जमानत केवल 20 फरवरी तक बढ़ाई।

याचिका में कहा गया कि जयदीप सेंगर को स्टेज-IV ओरल कैंसर है, जिसमें पुनरावृत्ति के क्लिनिकल संकेत विकसित हो गए हैं और उसे लगातार विशेष उपचार की आवश्यकता है। यह भी बताया गया कि वह लगभग चार वर्ष से अधिक समय हिरासत में रह चुका है।

हाईकोर्ट ने उसे पहली बार 3 जुलाई 2024 को अंतरिम जमानत दी थी, जिसे समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा है।

कुलदीप सेंगर को दिसंबर 2019 में उन्नाव दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। पीड़िता उस समय नाबालिग थी।

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अभिरक्षा मृत्यु मामले में ट्रायल कोर्ट ने 13 मार्च 2020 को कुलदीप सेंगर और जयदीप सेंगर को 10 वर्ष के कठोर कारावास और ₹10 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई थी। पीड़िता के पिता को Arms Act के तहत गिरफ्तार किया गया था और 9 अप्रैल 2018 को पुलिस हिरासत में उनकी मृत्यु हो गई थी। ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि परिवार के “एकमात्र कमाने वाले सदस्य” की हत्या के मामले में “कोई नरमी” नहीं बरती जा सकती।

ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपीलें दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित हैं।

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