सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तमिलनाडु सरकार को आदेश दिया कि वह राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति के लिए एक सप्ताह के भीतर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को संशोधित प्रस्ताव भेजे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने निर्देश दिया कि UPSC इस प्रस्ताव पर दो सप्ताह के भीतर अपनी अंतिम सिफारिश दे और इसके बाद नियुक्ति तत्काल की जाए।
पीठ ने अपने 5 फरवरी के आदेश का हवाला दिया, जो तेलंगाना में DGP की नियुक्ति से संबंधित मामले में पारित किया गया था। उस आदेश में शीर्ष अदालत ने कई राज्यों द्वारा DGP की नियुक्ति हेतु प्रस्ताव भेजने में हो रही अत्यधिक देरी को गंभीरता से लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने UPSC को यह अधिकार भी दिया था कि वह संबंधित राज्य सरकारों को समयबद्ध तरीके से प्रस्ताव भेजने के लिए पत्र भेजे और यदि राज्य ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो UPSC अदालत के समक्ष उपयुक्त आवेदन दाखिल कर सकता है।
गुरुवार की सुनवाई में पीठ को सूचित किया गया कि तमिलनाडु के कार्यवाहक DGP भी नियमित नियुक्ति के लिए विचाराधीन हैं, इसलिए उन्हें चयन समिति का सदस्य नहीं बनाया जा सकता। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु सरकार समिति में राज्य से दो सदस्य नामित कर सकती है और उसे यह अनुमति दी गई कि वह DGP के समकक्ष या उच्च पदाधिकारी को चयन समिति में नियुक्त कर सकती है।
शीर्ष अदालत ने प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले में दिए गए अपने दिशा-निर्देशों की पुनः पुष्टि की, जिनमें उल्लेख किया गया है:
- DGP की नियुक्ति UPSC द्वारा पैनल में शामिल तीन वरिष्ठतम IPS अधिकारियों में से की जाए।
- DGP का कार्यकाल कम से कम दो वर्ष का हो।
सुनवाई के दौरान यह भी दोहराया गया कि कई राज्य अब भी इन निर्देशों के अनुपालन में ढिलाई बरत रहे हैं, जिससे पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता और स्वायत्तता प्रभावित हो रही है।
अब तमिलनाडु सरकार और UPSC को सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई समयसीमा के अनुसार अगली कार्रवाई करनी होगी।

