केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने देश की प्रत्यक्ष कर व्यवस्था में व्यापक बदलाव की नींव रखते हुए ‘ड्राफ्ट आयकर नियम, 2026’ जारी कर दिए हैं। ये नियम ऐतिहासिक आयकर अधिनियम, 2025 (2025 का अधिनियम संख्या 30) को क्रियान्वित करने के लिए तैयार किए गए हैं। लगभग छह दशकों से चले आ रहे 1962 के नियमों की जगह लेने वाले ये नए नियम कर प्रशासन को सरल बनाने और मुकदमेबाजी को कम करने के उद्देश्य से लाए गए हैं।
मसौदा अधिसूचना के नियम 1 के अनुसार, इन नियमों को आयकर नियम, 2026 कहा जाएगा और ये 1 अप्रैल, 2026 से लागू होंगे, जो कि नए अधिनियम के प्रभावी होने की तिथि भी है।
आयकर अधिनियम, 2025 का कार्यान्वयन
ये ड्राफ्ट नियम, आयकर अधिनियम, 2025 के मूल प्रावधानों को लागू करने के लिए एक प्रक्रियात्मक ढांचा प्रदान करते हैं। ड्राफ्ट के नियम 2 में स्पष्ट किया गया है कि “अधिनियम” का तात्पर्य आयकर अधिनियम, 2025 से है। इसके अलावा, परिभाषाओं को मानकीकृत करते हुए कहा गया है कि “अधिकृत बैंक” का अर्थ उन बैंकों से है जिन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45(1) के तहत एजेंट के रूप में नियुक्त किया गया है।
लाभांश (Dividend) की घोषणा के लिए अनिवार्य शर्तें (नियम 3)
ड्राफ्ट नियमों में एक महत्वपूर्ण प्रावधान नियम 3 है, जो यह निर्धारित करता है कि किसी कंपनी को भारत के भीतर लाभांश घोषित और भुगतान करने वाली कंपनी माने जाने के लिए किन व्यवस्थाओं का पालन करना होगा। यह नए अधिनियम की धारा 2(42) के उद्देश्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
घरेलू कंपनी के रूप में लाभांश वितरण का लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित कड़ी शर्तों को पूरा करना अनिवार्य होगा:
- शेयर रजिस्टर का रखरखाव: कंपनी को भारत में अपने मुख्य व्यवसाय स्थल पर सभी शेयरधारकों के लिए शेयर रजिस्टर नियमित रूप से बनाए रखना होगा। यह किसी भी कर वर्ष (Tax Year) के लिए उस वर्ष की 1 अप्रैल से पहले की तारीख से किया जाना चाहिए।
- भारत में आम बैठक (General Meeting): कर वर्ष के खातों को पारित करने और किसी भी लाभांश (वरीयता शेयरों सहित) की घोषणा के लिए आम बैठक अनिवार्य रूप से भारत के भीतर ही आयोजित की जानी चाहिए।
- निरीक्षण की सुविधा: सदस्यों के रजिस्टर और लाभांश रजिस्टर कंपनी के भारत स्थित पंजीकृत कार्यालय में निरीक्षण के लिए खुले होने चाहिए।
यह नियम सुनिश्चित करता है कि जो कंपनियां लाभांश वितरण के संबंध में घरेलू संस्थाओं के रूप में लाभ या दर्जा प्राप्त करना चाहती हैं, वे अपने प्राथमिक कॉर्पोरेट गवर्नेंस कार्य भारत के अधिकार क्षेत्र में ही रखें।
पॉवर और इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स के लिए मूल्यह्रास (Depreciation) की नई दरें
ड्राफ्ट नियमों में विशेष रूप से बिजली और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों के लिए मूल्यह्रास (Depreciation) दरों का विस्तृत वर्गीकरण किया गया है। ड्राफ्ट के साथ संलग्न अनुसूची (पेज 410) के अनुसार, बिजली वितरण और उत्पादन में उपयोग की जाने वाली संपत्तियों के लिए निम्नलिखित दरें प्रस्तावित हैं:
- बैटरियां (Batteries): एनर्जी स्टोरेज और इलेक्ट्रिक वाहन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए बैटरियों पर 33.40% की उच्च मूल्यह्रास दर प्रस्तावित की गई है।
- ट्रांसफॉर्मर (Transformers): 100 किलोवोल्ट एम्पीयर और उससे अधिक की रेटिंग वाले ट्रांसफॉर्मर पर 7.81% की दर लागू होगी, जबकि अन्य पर 7.84% की दर होगी।
- स्विचगियर और लाइटनिंग अरेस्टर: सामान्यतः 7.84% की दर प्रस्तावित है, लेकिन पोल टाइप अरेस्टर के लिए यह 12.77% होगी।
- एयर-कंडीशनिंग प्लांट: स्टेटिक प्लांट्स के लिए 12.77% और पोर्टेबल यूनिट्स के लिए 33.40% की दर निर्धारित की गई है।
अनुपालन बोझ में भारी कमी
नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य करदाताओं पर अनुपालन बोझ (Compliance Burden) को कम करना है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पुराने शासन में नियमों की संख्या 511 थी, जिसे 2026 के नियमों में तर्कसंगत बनाकर लगभग 333 कर दिया गया है। इसी तरह, फॉर्मों की संख्या भी लगभग 400 से घटाकर 190 के करीब लाए जाने की उम्मीद है, जिससे फाइलिंग प्रक्रिया सरल होगी।
जनता से सुझाव आमंत्रित
CBDT ने इन ड्राफ्ट नियमों को सार्वजनिक डोमेन में रखा है ताकि हितधारक, कर पेशेवर और आम जनता अपने सुझाव दे सकें। सुझाव भेजने की अंतिम तिथि 22 फरवरी, 2026 है। प्राप्त सुझावों की समीक्षा के बाद, 1 अप्रैल, 2026 से कार्यान्वयन के लिए अंतिम नियमों को अधिसूचित किया जाएगा।

