उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को उन विधायकों के खिलाफ लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय लेने के लिए तीन सप्ताह का अंतिम समय दिया है, जिन्होंने भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति ए. जी. मसीह की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि इस समय सीमा के भीतर निर्णय नहीं लिया गया, तो अदालत स्पीकर के विरुद्ध अवमानना की कार्यवाही शुरू करेगी।
पीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि स्पीकर सकारात्मक रूप से निर्णय लेंगे, अन्यथा हम अवमानना जारी करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।”
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद तेलंगाना के 10 बीआरएस विधायकों के सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी में शामिल होने के बाद शुरू हुआ था। बीआरएस ने इन विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए स्पीकर के समक्ष याचिकाएं दायर की थीं। जब वहां कार्यवाही में देरी हुई, तो मामला तेलंगाना हाईकोर्ट पहुंचा।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 22 नवंबर, 2024 को एकल न्यायाधीश के उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें चार सप्ताह की समय सीमा तय की गई थी। खंडपीठ ने स्पीकर को ‘उचित समय’ में निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इस अनिश्चित समय सीमा के खिलाफ बीआरएस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। 31 जुलाई, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को पलटते हुए स्पीकर को तीन महीने के भीतर याचिकाओं पर फैसला करने का आदेश दिया।
आदेश के उल्लंघन का इतिहास
सुप्रीम कोर्ट के जुलाई 2025 के आदेश के बावजूद, स्पीकर ने तय समय में निर्णय नहीं लिया, जिसके बाद उनके खिलाफ अवमानना याचिकाएं दायर की गईं। दिसंबर 2025 तक, स्पीकर ने 10 में से केवल सात याचिकाओं को खारिज किया था। 16 जनवरी, 2026 को पिछली सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार ने और समय मांगा था, जिस पर अदालत ने दो सप्ताह की मोहलत दी थी।
अदालत में दलीलें
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान, राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ए. एम. सिंघवी ने पीठ को सूचित किया कि एक और याचिका पर निर्णय ले लिया गया है। उन्होंने शेष याचिकाओं के लिए आगामी नगर निकाय चुनावों का हवाला देते हुए तीन सप्ताह का और समय मांगा।
याचिकाकर्ताओं (बीआरएस) के वकील ने इस अनुरोध का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि देरी के लिए तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और नगर निकाय चुनावों का इस न्यायिक प्रक्रिया से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि लगातार हो रही देरी पर सख्त कार्रवाई की जाए।
न्यायालय का विश्लेषण और निर्णय
पीठ ने संज्ञान लिया कि यह मामला दिसंबर 2024 से शीर्ष अदालत में लंबित है और स्पीकर को दसवीं अनुसूची के तहत अपने संवैधानिक दायित्व को पूरा करने के कई अवसर दिए जा चुके हैं।
देरी को गंभीरता से लेते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने तीन सप्ताह की अंतिम मोहलत दी है। अदालत ने जोर देकर कहा कि स्पीकर को इस अवधि के भीतर “सकारात्मक रूप से” निर्णय लेना होगा। पीठ ने चेतावनी दी कि यदि इस बार भी समय सीमा का उल्लंघन हुआ, तो अदालत अवमानना की कार्यवाही करने में संकोच नहीं करेगी।
इस मामले की अगली सुनवाई अब तीन सप्ताह बाद होगी, जिसमें स्पीकर द्वारा किए गए अनुपालन की समीक्षा की जाएगी।

