केंद्र सरकार ने सरकारी वकीलों की फीस में की भारी बढ़ोतरी – जानिये अब कितनी फीस पाएंगे केंद्र सरकार के वकील

केंद्र सरकार ने देश भर की अदालतों में अपना पक्ष रखने वाले सरकारी वकीलों (Government Counsels) के लिए एक बड़ी खुशखबरी दी है। विधि एवं न्याय मंत्रालय (Ministry of Law and Justice) के कानूनी मामलों के विभाग ने सरकारी वकीलों की फीस संरचना में व्यापक संशोधन किया है। 5 फरवरी, 2026 को जारी कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) के अनुसार, नई दरें सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, ट्रिब्यूनल, जिला अदालतों और मध्यस्थता अधिकरणों (Arbitration Tribunals) में पेश होने वाले सभी श्रेणियों के वकीलों पर लागू होंगी।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह संशोधित शुल्क संरचना 1 फरवरी, 2026 से प्रभावी हो गई है।

सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के लिए नई दरें (तालिका ‘A’)

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों की फीस में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। यहां वकीलों को मुख्य रूप से ग्रुप ‘ए’ और ग्रुप ‘बी’ व ‘सी’ में वर्गीकृत किया गया है।

  • अंतिम सुनवाई (Final Hearings): नियमित अपील और रिट याचिकाओं की अंतिम सुनवाई के लिए ग्रुप ‘ए’ के वकीलों को अब 21,600 रुपये प्रतिदिन प्रति केस मिलेंगे। वहीं, ग्रुप ‘बी’ और ‘सी’ के वकीलों के लिए यह राशि 14,400 रुपये तय की गई है।
  • एडमिशन मामले: एसएलपी (SLP) और रिट याचिकाओं जैसे एडमिशन मामलों (Defended Admission matters) के लिए ग्रुप ‘ए’ को 14,400 रुपये और अन्य को 7,200 रुपये मिलेंगे।
  • ड्राफ्टिंग: एसएलपी, जवाबी हलफनामा (Counter Affidavit) या प्रत्युत्तर (Rejoinder) तैयार करने के लिए भी ग्रुप ‘ए’ के लिए 14,400 रुपये और ग्रुप ‘बी’ व ‘सी’ के लिए 7,200 रुपये की फीस निर्धारित की गई है।
  • बाहरी सेवाएं: मुख्यालय से बाहर सेवाओं के लिए दैनिक शुल्क सुनवाई शुल्क के बराबर ही रखा गया है।
READ ALSO  घरेलू कामगारों के शोषण के लिए हिंदुजा परिवार के सदस्यों को जेल की सजा

हाईकोर्ट और ट्रिब्यूनल (तालिका ‘B’)

देश भर के हाईकोर्ट्स (बॉम्बे और कलकत्ता हाईकोर्ट की प्रधान पीठों को छोड़कर) और ट्रिब्यूनल्स के लिए भी नई दरें लागू होंगी। यह डिप्टी सॉलिसिटर जनरल (Dy. SG) और वरिष्ठ केंद्र सरकार के स्थायी वकीलों (Sr. CGSC) पर लागू होगा।

  • रिटेनरशिप: सभी डिप्टी सॉलिसिटर जनरल और वरिष्ठ वकीलों के लिए 14,400 रुपये प्रति माह की रिटेनरशिप फीस तय की गई है।
  • सुनवाई: रिट याचिकाओं, अपीलों और मुकदमों में प्रभावी सुनवाई (Effective Hearing) के लिए 14,400 रुपये प्रति केस प्रतिदिन मिलेंगे। गैर-प्रभावी सुनवाई (Non-effective hearing) के लिए 2,400 रुपये (अधिकतम 5 सुनवाई तक) दिए जाएंगे।
  • ड्राफ्टिंग: प्लीडिंग्स और जवाबी हलफनामा तैयार करने के लिए प्रति प्लीडिंग 4,800 रुपये मिलेंगे।
READ ALSO  झारखंड की आईएएस अधिकारी छवि रंजन की ईडी हिरासत बढ़ाई गई

बॉम्बे और कलकत्ता हाईकोर्ट के लिए विशेष प्रावधान (तालिका ‘C’)

बॉम्बे और कलकत्ता हाईकोर्ट की प्रधान पीठों (Principal Benches) में मुकदमों की प्रकृति को देखते हुए वहां के लिए अलग फीस तालिका जारी की गई है।

  • विशेष वकील (Special Counsel): यहां प्रभावी सुनवाई के लिए विशेष वकील को 14,400 रुपये मिलेंगे। सीनियर काउंसिल ग्रुप-I को 9,600 रुपये और ग्रुप-II को 6,000 रुपये दिए जाएंगे।
  • ड्राफ्टिंग: विशेष वकील को ड्राफ्टिंग के लिए 6,000 रुपये और सीनियर काउंसिल ग्रुप-I को 4,800 रुपये मिलेंगे।

जिला और अधीनस्थ न्यायालय (तालिका ‘D’)

देश भर के जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में नियुक्त स्थायी सरकारी वकीलों (Standing Government Counsel) के लिए भी दरों में बदलाव किया गया है:

  • रिटेनरशिप: दिल्ली को छोड़कर अन्य सभी जगहों पर मासिक रिटेनरशिप फीस 9,600 रुपये होगी।
  • सुनवाई: प्रभावी सुनवाई के लिए 2,880 रुपये प्रतिदिन और गैर-प्रभावी सुनवाई के लिए 960 रुपये मिलेंगे।
  • ड्राफ्टिंग: लिखित बयान (Written Statement) या अपील के आधार तैयार करने के लिए 2,400 रुपये प्रति प्लीडिंग दिए जाएंगे।

मध्यस्थता मामले (तालिका ‘E’)

आर्बिट्रेशन या मध्यस्थता के मामलों के लिए भी नई दरें घोषित की गई हैं:

  • सीनियर आर्बिट्रेशन काउंसिल: 3,600 रुपये प्रति प्रभावी सुनवाई।
  • जूनियर आर्बिट्रेशन काउंसिल: 2,400 रुपये प्रति प्रभावी सुनवाई।
READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 294 के दायरे और अनुप्रयोग को समझाया

भत्ते और अन्य शर्तें

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी वकील को आधिकारिक कार्य के लिए अपने मुख्यालय से बाहर यात्रा करनी पड़ती है, तो उन्हें यात्रा, बोर्डिंग और लॉजिंग का खर्च दिया जाएगा। वरिष्ठ श्रेणियों के लिए यह 7वें वेतन आयोग (7th CPC) के लेवल-12 और अन्य के लिए लेवल-11 के अनुसार होगा।

कनेक्टेड केस (Connected Cases): मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि यदि एक जैसे मामलों (Connected Cases) में समान हलफनामे या याचिकाएं तैयार की जाती हैं, तो पूरी ड्राफ्टिंग फीस केवल मुख्य मामले (Main Case) में ही दी जाएगी। जुड़े हुए अन्य मामलों के लिए नाममात्र अतिरिक्त शुल्क (जैसे हाईकोर्ट में 1,500 रुपये प्रति केस) ही देय होगा।

यह संशोधन वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग (Department of Expenditure) की मंजूरी से जारी किया गया है। 1 फरवरी, 2026 से पहले किए गए कार्यों का भुगतान पुरानी दरों पर ही किया जाएगा।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles