सुप्रीम कोर्ट ने फ्लिपकार्ट के खिलाफ जांच के NCLAT के आदेश को किया रद्द; नए सिरे से सुनवाई के निर्देश

ई-कॉमर्स क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम में, भारत के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के उस 2020 के आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें फ्लिपकार्ट के खिलाफ प्रतिस्पर्धा कानून के कथित उल्लंघन की जांच का निर्देश दिया गया था।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले को नए सिरे से विचार के लिए वापस NCLAT को भेज (रिमांड) दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपीलेट ट्रिब्यूनल को उन कानूनी बदलावों को ध्यान में रखते हुए मामले पर पुनर्विचार करना चाहिए, जिन्होंने मूल आदेश के आधार को प्रभावित किया है।

यह कानूनी विवाद ‘ऑल इंडिया ऑनलाइन वेंडर्स एसोसिएशन’ (AIOVA) द्वारा दायर एक शिकायत से शुरू हुआ था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि फ्लिपकार्ट ने प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 की धारा 4 का उल्लंघन किया है। यह धारा बाजार में अपनी मजबूत स्थिति (Dominant Position) का दुरुपयोग करने और ‘प्रिडेटरी प्राइसिंग’ जैसे अनुचित व्यापारिक तौर-तरीकों से जुड़ी है।

शुरुआत में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने इस शिकायत को बंद कर दिया था, लेकिन 4 मार्च 2020 को NCLAT ने इस आदेश को पलट दिया। ट्रिब्यूनल ने तब माना था कि फ्लिपकार्ट के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है और CCI के महानिदेशक को जांच के निर्देश दिए थे। फ्लिपकार्ट ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

READ ALSO  एफआईआर दुर्भावनापूर्ण और द्वेषपूर्ण उद्देश्य से दर्ज की गई: सुप्रीम कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न मामले में आपराधिक कार्यवाही को किया रद्द

फ्लिपकार्ट इंटरनेट प्राइवेट लिमिटेड की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने तर्क दिया कि NCLAT का आदेश बुनियादी रूप से दोषपूर्ण था। उन्होंने बताया कि ट्रिब्यूनल का फैसला मुख्य रूप से आयकर कार्यवाही के दौरान एक निर्धारण अधिकारी (Assessing Officer) द्वारा की गई टिप्पणियों पर आधारित था। हालांकि, बाद में इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने उन टिप्पणियों और निष्कर्षों को रद्द कर दिया था।

सिंघवी ने अपनी दलीलों में यह भी कहा:

  • बाजार में फ्लिपकार्ट की ‘दबदबे वाली स्थिति’ को लेकर कोई तथ्यात्मक निष्कर्ष नहीं था।
  • स्वयं CCI ने अपनी आंतरिक जांच में पहले ही कह दिया था कि फ्लिपकार्ट बाजार में कोई प्रभावी या दबदबा रखने वाली कंपनी नहीं है।
  • सिंघवी के अनुसार, ऑनलाइन मार्केटप्लेस में फ्लिपकार्ट के बजाय अमेज़न का दबदबा अधिक है।
  • उन्होंने ‘कोल इंडिया लिमिटेड’ मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित मानकों का हवाला देते हुए कहा कि फ्लिपकार्ट के मामले में इनमें से कोई भी शर्त पूरी नहीं होती।
READ ALSO  छेड़छाड़ की कोशिश करने, उसे गंभीर चोटें पहुंचाने के आरोप में व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई

पीठ ने गौर किया कि चूंकि आयकर कार्यवाही के जिन साक्ष्यों पर NCLAT ने भरोसा किया था, उन्हें ITAT पहले ही रद्द कर चुका है, इसलिए मामले पर नए सिरे से विचार करना आवश्यक है।

पीठ ने आदेश दिया, “हम NCLAT से अनुरोध करते हैं कि वह इस कोर्ट द्वारा ‘कोल इंडिया लिमिटेड’ सहित विभिन्न फैसलों में बताए गए सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए अपील पर फिर से निर्णय ले।”

READ ALSO  कुछ जज आलसी हैं और समय पर फैसला नहीं लिखते: रिटायर्ड जस्टिस चेलमेश्वर

कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि उसने मामले के गुणों (Merits) पर कोई राय व्यक्त नहीं की है और सभी कानूनी पहलुओं को NCLAT के समक्ष खुला रखा है। अब दोनों पक्ष यह साबित करने के लिए अपनी दलीलें पेश कर सकते हैं कि क्या वास्तव में कोई प्रथम दृष्टया मामला बनता है और क्या टैक्स से जुड़े पुराने निष्कर्षों के अलावा अन्य आधारों पर CCI जांच की आवश्यकता है।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles