दिल्ली हाईकोर्ट ने ₹640 करोड़ साइबर धोखाधड़ी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दो चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कीं

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को ₹640 करोड़ की साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दो चार्टर्ड अकाउंटेंट्स – भास्कर यादव और अशोक कुमार शर्मा – को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया ने 22 पृष्ठों के फैसले में कहा कि अभियोजन एजेंसी द्वारा दोनों आरोपियों से हिरासत में पूछताछ की मांग अनुचित नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि आरोपी पेशेवर कुशलता का उपयोग कर अपराध से अर्जित धन को कई स्तरों पर छिपाने का जटिल तंत्र विकसित कर चुके हैं। “अभियुक्त/आवेदक पेशेवर रूप से दक्ष व्यक्ति हैं, जिन्होंने कथित रूप से अपराध की राशि को कई स्तरों पर ले जाकर उसका शोधन किया है। इसे उजागर करने के लिए हिरासत में पूछताछ की ज़रूरत को लेकर प्रवर्तन निदेशालय की दलील में दम है,” कोर्ट ने कहा।

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न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल क्रिप्टोकरेंसी में लेन-देन तक सीमित नहीं है। “यह मात्र क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ा मामला नहीं है, जो अपने आप में भारत में अपराध नहीं है, बल्कि इसमें धोखाधड़ी से अर्जित भारी रकम को अलग-अलग तरीकों से छिपाकर इस्तेमाल किया गया है,” कोर्ट ने कहा।

कोर्ट ने अपने आदेश में इस बात पर भी चिंता जताई कि आरोपियों पर जांच अधिकारियों पर हमला करने, स्थानीय पुलिस को रिश्वत देकर शिकायतों को दबाने और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य नष्ट करने के गंभीर आरोप हैं।

“यह पीड़ितों की मेहनत की कमाई थी, जिन्हें बस अपनी बचत को निवेश द्वारा बढ़ाना था। इसी मानवीय स्वाभाविक इच्छा का कुछ धोखेबाजों ने दुरुपयोग किया,” कोर्ट ने कहा।

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अदालत ने यह भी कहा कि स्वतंत्रता का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में गहन पूछताछ को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

यह मनी लॉन्ड्रिंग मामला दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज दो एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें ₹640 करोड़ की साइबर ठगी के आरोप लगे थे। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुसार, धोखाधड़ी में निवेश, सट्टेबाज़ी, जालसाज़ी और फर्जी पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर लोगों को फंसाया गया।

धोखाधड़ी की रकम को 5,000 से अधिक “म्यूल” भारतीय बैंक खातों के माध्यम से कई परतों में ले जाकर एक यूएई स्थित भुगतान प्लेटफॉर्म PYYPL पर अपलोड किया गया। ईडी के अनुसार, इसमें शामिल रकम को दुबई में भारतीय बैंकों के डेबिट और क्रेडिट कार्ड से नकद निकाला गया।

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एजेंसी ने आरोप लगाया कि इस पूरे घोटाले के पीछे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कंपनी सेक्रेटरीज़ और क्रिप्टो ट्रेडर्स का एक गठजोड़ काम कर रहा था, जो मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम दे रहा था।

जांच एजेंसी अब इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और उससे जुड़े पेशेवरों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है।

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