उत्तराखंड हाईकोर्ट ने देहरादून के गुणियाल गांव में प्रस्तावित ‘सैनिक धाम’ के निर्माण पर रोक लगाने की मांग करने वाली जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिस भूमि पर यह युद्ध स्मारक बनाया जा रहा है, वह वन भूमि नहीं है, और ऐसे में निर्माण रोकने का कोई वैधानिक आधार नहीं बनता।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता विकास सिंह नेगी की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा जिस जमीन पर सैनिक धाम बनाया जा रहा है, उसकी प्रकृति को लेकर कोई विवाद नहीं है। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि सरकार बिना भूमि की स्थिति निर्धारित किए निर्माण कार्य कर रही है और संबंधित भूमि वन क्षेत्र में आती है।
याचिका में निर्माण कार्य पर तत्काल रोक, जमीन को वन विभाग को सौंपने, कथित अवैध भूमि उपयोग परिवर्तन की जांच SIT या CBI से कराने, अतिक्रमण हटाने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई थी।
राज्य सरकार की ओर से पेश जवाब में बताया गया कि राजस्व और वन विभाग की संयुक्त भूमि सर्वे रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि यह भूमि किसी भी वन क्षेत्र का हिस्सा नहीं है। साथ ही, वन विभाग ने भी सैनिक धाम के लिए भूमि आवंटन पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
कोर्ट ने कहा कि जब सक्षम वन प्राधिकारी यह प्रमाणित कर चुके हैं कि जमीन वन भूमि नहीं है, तो याचिका का कोई कानूनी आधार नहीं बचता। अदालत ने यह भी ध्यान में लिया कि सैनिक धाम का निर्माण 2021 से जारी है और अब लगभग पूरा हो चुका है। जल्द ही इसका उद्घाटन भी प्रस्तावित है।
इन तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया, जिससे राज्य सरकार के इस युद्ध स्मारक परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।

