इलाहाबाद हाईकोर्ट: बेसहारा लोगों के लिए राज्य स्तरीय हेल्पलाइन शुरू करे यूपी सरकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बुधवार को उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह प्रदेश में बेसहारा और निराश्रित व्यक्तियों की पहचान एवं सहायता के लिए एक समर्पित राज्य स्तरीय हेल्पलाइन प्रणाली शुरू करे। अदालत ने इस मुद्दे पर गंभीरता जताते हुए कहा कि समाज के सबसे वंचित वर्ग तक मदद पहुंचाना राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति ए. के. चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश ज्योति राजपूत द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें प्रदेश में सड़कों पर घूम रहे बेसहारा लोगों की दशा और उनके पुनर्वास की जरूरत को उठाया गया था।

अदालत ने निर्देश दिया कि कम से कम चार हेल्पलाइन नंबर तुरंत संचालित किए जाएं और उनका व्यापक प्रचार किया जाए, ताकि आम नागरिक कहीं भी किसी निराश्रित व्यक्ति को देखकर तत्काल सूचना दे सकें। ऐसी सूचना मिलने पर संबंधित सरकारी अधिकारी मौके पर पहुंचकर राहत और पुनर्वास की कार्रवाई करें।

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खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि 24 दिसंबर 2025 को जारी सरकारी आदेश के तहत गठित 11 सदस्यीय टास्क फोर्स की भूमिका अब निर्णायक हो जाती है। हेल्पलाइन पर आने वाली सूचनाओं के आधार पर यह टास्क फोर्स बेसहारा लोगों की पहचान और सहायता की प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से लागू कर सकती है।

राज्य सरकार को निर्देशित किया गया है कि वह इस संबंध में एक ठोस और व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार कर अगली सुनवाई की तारीख 23 फरवरी तक अदालत में प्रस्तुत करे।

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