पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पंजाब सरकार को निर्देश दिया कि खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह द्वारा संसद के आगामी बजट सत्र में भाग लेने के लिए मांगी गई पैरोल याचिका पर 7 कार्यदिवसों के भीतर निर्णय लिया जाए।
मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने यह निर्देश देते हुए याचिका का निपटारा किया और कहा कि 17 जनवरी 2026 को दी गई अर्जी पर पंजाब के गृह सचिव कानून के अनुसार निर्णय लें और परिणाम की जानकारी याचिकाकर्ता तथा उसके अधिवक्ता को तत्काल दी जाए।
अमृतपाल सिंह इस समय राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA), 1980 के तहत असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं। उन्होंने धारा 15 के तहत अस्थायी रिहाई की मांग की है, ताकि वह 28 जनवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र में हिस्सा ले सकें।
कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि अमृतपाल की नजरबंदी का आदेश 17 अप्रैल 2025 को अमृतसर के जिलाधिकारी द्वारा जारी किया गया था, जो राज्य सरकार के अधीन अधिकारी हैं। अतः राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम की धारा 2(1)(a) के अनुसार, ‘उचित सरकार’ पंजाब सरकार ही है और वही इस तरह की याचिका पर निर्णय लेने की अधिकारप्राप्त संस्था है।
“धारा 15 के तहत अस्थायी रिहाई पर निर्णय लेने की शक्ति ‘उचित सरकार’ के पास है, और इस मामले में यह पंजाब सरकार है,” अदालत ने कहा।
33 वर्षीय अमृतपाल सिंह, जो ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन के प्रमुख हैं, को 23 अप्रैल 2023 को मोगा के रोडे गांव से गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले उन्होंने 18 मार्च 2023 को पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए गाड़ियों और रूप बदलकर भागने की कोशिश की थी।
उनकी गिरफ्तारी अजनाला पुलिस थाने पर हमले के मामले के बाद हुई, जब अमृतपाल और उनके समर्थकों ने तलवारों व बंदूकों के साथ पुलिस थाने में घुसकर अपने एक साथी की रिहाई की मांग की थी।
2024 के लोकसभा चुनावों में अमृतपाल ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में खडूर साहिब से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।
हालांकि, अप्रैल 2025 में उनकी नजरबंदी की अवधि बढ़ा दी गई थी, जबकि उनके 9 सहयोगियों को पंजाब वापस भेज दिया गया था। ये सहयोगी भी अजनाला कांड में गिरफ्तार हुए थे।
अमृतपाल ने इससे पहले संसद के शीतकालीन सत्र में भाग लेने के लिए भी पैरोल की मांग की थी, लेकिन उस याचिका पर सुनवाई समय पर पूरी नहीं हो सकी और मामला निष्फल हो गया।
इस बार अमृतपाल ने अपनी याचिका में कहा है कि वे 2025 की पंजाब में आई बाढ़, नशाखोरी की बढ़ती समस्या, और अपने संसदीय क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों को संसद में उठाना चाहते हैं।

