दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को NEET PG 2025 की पात्रता कट-ऑफ अंक सीमा घटाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा का उद्देश्य पहले से प्रशिक्षित डॉक्टरों को किसी विशिष्ट क्षेत्र में और अधिक दक्ष बनाना है, न कि उनकी मौजूदा योग्यता पर सवाल उठाना।
मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने स्पष्ट किया कि NEET PG परीक्षा केवल MBBS पास छात्रों को विशेषज्ञता पाठ्यक्रमों में प्रवेश देने के लिए “छांटने” का एक तरीका है। यह किसी डॉक्टर की गुणवत्ता को प्रमाणित नहीं करती।
“सिर्फ इतना तर्क सामने आया कि कट-ऑफ घटाने से कम योग्य MBBS डॉक्टर पीजी कोर्स में आ जाएंगे। लेकिन उच्च शिक्षा देने का उद्देश्य क्या है? उन्हें किसी क्षेत्र में और अधिक दक्ष बनाना। यह परीक्षा किसी डॉक्टर की गुणवत्ता का स्वतः मूल्यांकन नहीं करती,” अदालत ने कहा।
याचिकाकर्ता का दावा था कि न्यूनतम अर्हता अंक में भारी कमी से चिकित्सा के क्षेत्र में गुणवत्ता से समझौता होगा और इससे जनता की जान को खतरा पैदा हो सकता है। लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया।
पीठ ने पूछा,
“क्या सीटें खाली छोड़ना जनहित में होगा? नहीं, हम इसकी अनुमति नहीं देंगे।”
नेशनल बोर्ड ऑफ एग्ज़ामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज़ (NBEMS) और अन्य संबंधित अधिकारियों के वकील ने दलील दी कि NEET PG की कट-ऑफ घटाने का निर्णय मौजूदा नियमों के तहत लिया गया है, ताकि जिस वर्ष सीटें खाली रह जाती हैं, उनमें अधिक अभ्यर्थियों को मौका मिल सके।
सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि दूसरे राउंड की काउंसलिंग के बाद भी देशभर में हजारों सीटें खाली थीं। कट-ऑफ घटाने से वे छात्र भी आवेदन कर पाएंगे जो सामान्यतः कम मांग वाले पाठ्यक्रमों में जाना चाहते हैं।
यह भी बताया गया कि तीसरे राउंड की काउंसलिंग संशोधित कट-ऑफ के तहत पहले से चल रही है। साथ ही, इसी मुद्दे पर एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी दाखिल है, लेकिन वह अभी सूचीबद्ध नहीं हुई है।
इस महीने की शुरुआत में NBEMS ने NEET PG 2025-26 की अर्हता प्रतिशतता सभी वर्गों के लिए घटा दी थी। सामान्य वर्ग के लिए कट-ऑफ 50 परसेंटाइल से घटाकर मात्र 7 परसेंटाइल कर दी गई, जबकि आरक्षित वर्गों के लिए इसे 40 से घटाकर 0 कर दिया गया। इसका अर्थ यह है कि -40 अंक पाने वाले उम्मीदवार भी अब तीसरे दौर की काउंसलिंग में भाग ले सकते हैं।
यह निर्णय ऐसे समय पर लिया गया जब देशभर में लगभग 18,000 स्नातकोत्तर चिकित्सा सीटें खाली रह गई थीं।
अदालत ने कहा कि याचिका में कोई ठोस आधार नहीं है और यह निर्णय नीति के दायरे में आता है। अदालत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि NEET PG केवल एक प्रवेश परीक्षा है और इसका उद्देश्य यह तय करना नहीं है कि कौन बेहतर डॉक्टर है। देश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी आवश्यकता को देखते हुए सीटों को खाली छोड़ना जनहित के विपरीत होगा।

