राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत परिसीमन को चुनौती देने वाली 60 से अधिक याचिकाएं खारिज कीं, चुनाव का रास्ता साफ

राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने बुधवार को एक अहम फैसले में राज्य में पंचायत राज संस्थाओं के परिसीमन और पुनर्गठन को चुनौती देने वाली 60 से अधिक याचिकाओं को खारिज कर दिया। इस निर्णय से स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के चुनाव का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

न्यायमूर्ति इंदरजीत सिंह और न्यायमूर्ति रवि चिरानिया की पीठ ने स्पष्ट किया कि पंचायतों का परिसीमन एक नीतिगत और प्रशासनिक प्रक्रिया है। इस पर अत्यधिक न्यायिक हस्तक्षेप चुनावी प्रक्रिया में अनावश्यक देरी कर सकता है, जो किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।

“यदि हर चुनाव से पहले इस प्रकार की याचिकाओं को स्वीकार किया जाएगा, तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होगी और समय पर चुनाव कराना कठिन हो जाएगा,” अदालत ने कहा।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही राजस्थान में पंचायत परिसीमन और पुनर्गठन की प्रक्रिया को हरी झंडी दे चुका है। इस माह की शुरुआत में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची की पीठ ने इस संबंध में दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया था।

हाईकोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि उसने पहले ही 31 दिसंबर 2025 तक राज्यभर में परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करने और 15 अप्रैल 2026 तक सभी पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव कराए जाने का आदेश दिया था।

“चूंकि सुप्रीम कोर्ट भी 15 अप्रैल तक पंचायत चुनाव कराने का आदेश दे चुका है, इसलिए इस चरण में पुनर्गठन प्रक्रिया में हस्तक्षेप करना चुनावी प्रक्रिया को बाधित करेगा,” कोर्ट ने कहा।

इन याचिकाओं में राज्य सरकार द्वारा किए गए परिसीमन को कई आधारों पर चुनौती दी गई थी—जैसे कि प्रक्रिया में खामियां, पर्याप्त परामर्श का अभाव, और क्षेत्रीय सीमाओं के पुनर्निर्धारण में कथित मनमानी।

READ ALSO  अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट को असली एनसीपी के रूप में मान्यता देने के चुनाव आयोग के आदेश को शरद पवार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी

हालांकि अदालत ने पाया कि चुनाव के इतने निकट आने के बाद इनमें से कोई भी आधार हस्तक्षेप करने योग्य नहीं है, विशेष रूप से जब सर्वोच्च न्यायालय भी इस मुद्दे को देख चुका है।

इस फैसले के बाद अब राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव की तैयारियों को आगे बढ़ा सकता है। यह निर्णय न्यायपालिका के उस दृष्टिकोण को भी बल देता है कि चुनाव प्रक्रिया से ठीक पहले की गई कानूनी चुनौतियों से लोकतांत्रिक ढांचा प्रभावित नहीं होना चाहिए।

READ ALSO  अदालतें न्याय का मंदिर हैं, 7-स्टार होटल नहीं: नए हाईकोर्ट कॉम्पलेक्स के शिलान्यास पर बोले CJI गवई
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles