उन्नाव पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत मामले में कुलदीप सेंगर को राहत से इनकार, दिल्ली हाईकोर्ट ने सजा निलंबन याचिका खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को भाजपा से निष्कासित नेता कुलदीप सिंह सेंगर की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में मिली 10 साल की सजा को निलंबित करने की मांग की थी।

न्यायमूर्ति रविंदर डूडेजा ने कहा, “राहत दिए जाने के लिए कोई आधार नहीं बनता है। सजा निलंबन की याचिका खारिज की जाती है।”

हालांकि अदालत ने यह स्वीकार किया कि सेंगर ने लंबे समय तक जेल में सजा काटी है, लेकिन यह भी कहा कि अपील में देरी के लिए स्वयं याची आंशिक रूप से जिम्मेदार है, क्योंकि उन्होंने कई आवेदन दाखिल किए थे। अदालत ने कहा, “इस अपील का शीघ्र निपटारा कर दिया जाए तो उद्देश्य पूरा होगा।” अदालत ने इस मुख्य अपील को 3 फरवरी 2026 के लिए सूचीबद्ध किया है।

13 मार्च 2020 को ट्रायल कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को 10 साल की सश्रम कारावास और ₹10 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई थी। पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत की यह घटना उस समय हुई थी जब उन्हें आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था, जिसे अदालत ने सेंगर की सिफारिश पर की गई गिरफ़्तारी माना। 9 अप्रैल 2018 को हिरासत में पुलिस की बर्बरता के चलते उनकी मौत हो गई थी।

ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि यह मामला हत्या का नहीं बल्कि हत्या के समान गंभीर गैर इरादतन अपराध है। इसलिए आरोपियों को IPC की धारा 304 के तहत अधिकतम सजा दी गई। सेंगर के साथ-साथ उनके भाई अतुल सिंह सेंगर और पांच अन्य को भी 10-10 साल की सजा सुनाई गई थी।

अदालत ने टिप्पणी की थी, “एक परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य की हत्या के लिए कोई नरमी नहीं बरती जा सकती।”

इसके अलावा, कुलदीप सेंगर को 2017 में नाबालिग पीड़िता के अपहरण और बलात्कार के मामले में दोषी ठहराया गया था और आजीवन कारावास की सजा दी गई थी। यह सजा शेष जीवनकाल तक प्रभावी रहेगी। उस मामले में भी उनकी अपील दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है।

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दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर 2025 को बलात्कार मामले में उनकी सजा को अपील के विचाराधीन रहते हुए निलंबित कर दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 29 दिसंबर 2025 को उस आदेश पर रोक लगा दी थी।

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