महुआ मोइत्रा के खिलाफ चार्जशीट पर मंजूरी के मुद्दे में लोकपाल ने समय बढ़ाने की मांग की, दिल्ली हाई कोर्ट में 23 जनवरी को सुनवाई

लोकपाल ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट से आग्रह किया कि कथित कैश-फॉर-क्वेरी घोटाले में तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को मंजूरी देने के प्रश्न पर विचार करने के लिए उसे दी गई समय-सीमा बढ़ाई जाए।

न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति रेनू भटनागर की पीठ ने लोकपाल की उस अर्जी को, जिसमें अनुपालन के लिए दो माह का अतिरिक्त समय मांगा गया है, 23 जनवरी को उस पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया, जिसने मूल आदेश पारित किया था। सुनवाई के दौरान लोकपाल के वकील ने कहा कि अर्जी केवल मंजूरी के मुद्दे पर विचार के लिए समय-सीमा बढ़ाने से संबंधित है। इस पर अदालत ने कहा कि यह आदेश में संशोधन के समान है और इसे उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए।

गौरतलब है कि 19 दिसंबर 2025 को हाई कोर्ट ने लोकपाल के उस नवंबर आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें सीबीआई को मोइत्रा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की मंजूरी दी गई थी। अदालत ने लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम की धारा 20 के तहत मंजूरी के प्रश्न पर कानून के प्रावधानों के अनुसार, एक माह की अवधि में नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया था।

READ ALSO  गुजरात स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी ने अहमदाबाद एयर इंडिया विमान हादसे के पीड़ितों और उनके परिजनों की सहायता के लिए 24 घंटे की हेल्पलाइन शुरू की

वह आदेश न्यायमूर्ति अनिल क्षेतरपाल और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने पारित किया था। पीठ ने कहा था कि अधिनियम में स्पष्ट रूप से निर्धारित प्रक्रिया से “स्पष्ट विचलन” हुआ है और लोकपाल ने प्रावधानों की समझ और व्याख्या में त्रुटि की है।

कैश-फॉर-क्वेरी घोटाले में आरोप है कि महुआ मोइत्रा ने एक कारोबारी से नकद और उपहारों के बदले संसद में प्रश्न पूछे। 19 दिसंबर का फैसला मोइत्रा की उस याचिका पर आया था, जिसमें उन्होंने 12 नवंबर 2025 के लोकपाल आदेश को चुनौती दी थी।

READ ALSO  अग्रिम जमानत: यदि POCSO एक्ट के तहत आरोप प्रथम दृष्टया नहीं बनते हैं तो POCSO अधिनियम SC-ST अधिनियम में अपील के प्रावधानों पर हावी नहीं होगा: बॉम्बे हाईकोर्ट

सीबीआई ने जुलाई 2025 में इस मामले में अपनी रिपोर्ट लोकपाल को सौंपी थी। एजेंसी ने 21 मार्च 2024 को लोकपाल के संदर्भ पर, मोइत्रा और कारोबारी दर्शन हीरानंदानी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज की थी। आरोपों में यह भी कहा गया है कि मोइत्रा ने रिश्वत और अन्य अनुचित लाभ लिए और लोकसभा लॉग-इन क्रेडेंशियल साझा कर अपनी संसदीय विशेषाधिकारों से समझौता किया, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जोखिम उत्पन्न हुए।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles