सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तेलंगाना के एक वकील की उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया जिसमें उन्होंने राज्य बार काउंसिल चुनाव में नामांकन पर रोक को चुनौती दी थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि वकीलों के लिए नैतिकता का स्तर अन्य पेशों की तुलना में कहीं अधिक होता है, और लंबित आपराधिक शिकायतों के चलते ऐसे वकील को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने वकील रापोलू भास्कर की याचिका पर सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा कि “यह वह व्यक्ति नहीं है जिसे तेलंगाना स्टेट बार काउंसिल के चुनाव लड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए।”
“वकीलों के लिए नैतिक मानदंड अधिक कठोर”
भास्कर की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को किसी भी मामले में दोषसिद्ध या दंडित नहीं किया गया है, ऐसे में केवल शिकायतों के आधार पर उन्हें चुनाव लड़ने से रोका नहीं जाना चाहिए।
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने दो टूक कहा, “वकीलों के लिए नैतिक मूल्यों का स्तर अधिक होता है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब चुनावों में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार खड़े होते हैं तो वकील ही अदालतों का रुख करते हैं — ऐसे में उन्हें स्वयं भी उच्च मानदंडों का पालन करना चाहिए।
बार काउंसिल की भूमिका और सार्वजनिक धारणा
CJI सूर्यकांत ने वकीलों के संगठन में हालिया गिरती सार्वजनिक धारणा की ओर इशारा करते हुए कहा कि अगर बार काउंसिलें पेशेवर मानकों को बनाए रखने का प्रयास कर रही हैं, तो उन्हें ऐसा करने से रोका नहीं जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने बताया कि राज्य बार काउंसिल के निर्वाचित सदस्य केवल प्रतिनिधि नहीं होते, बल्कि अनुशासनात्मक मामलों में अर्ध-न्यायिक भूमिका भी निभाते हैं।
याचिका वापसी के साथ मामला समाप्त
भास्कर के वकील ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने करियर में लगभग 22,000 मुकदमे दायर किए हैं और केवल दो शिकायतों के आधार पर उन्हें चुनाव से वंचित करना उचित नहीं है, जबकि वे तीसरे पक्षों द्वारा दर्ज की गई हैं। हालांकि, जब पीठ ने स्पष्ट संकेत दिया कि राहत नहीं दी जाएगी, तो याचिकाकर्ता ने स्वयं ही अपनी याचिका वापस ले ली।
तेलंगाना बार काउंसिल चुनाव 31 जनवरी तक संपन्न करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट पहले ही निर्देश दे चुका है कि तेलंगाना स्टेट बार काउंसिल के चुनाव 31 जनवरी 2026 तक हर हाल में पूरे कर लिए जाएं। इस मामले में लिए गए रुख से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि न्यायपालिका पेशेवर संस्थानों में नैतिकता और अनुशासन के मानदंड बनाए रखने को लेकर पूरी तरह गंभीर है।

