सुप्रीम कोर्ट ने यूपी गैंगस्टर एक्ट मामले में अब्बास अंसारी की जमानत शर्तें ढीली कीं, राज्य से बाहर जाने की मिली अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के विधायक अब्बास अंसारी (स्वर्गीय मुख्तार अंसारी के पुत्र) को बड़ी राहत देते हुए उनकी जमानत शर्तों में ढील दी। अदालत ने उन्हें राज्य से बाहर जाने की अनुमति दी है, बशर्ते वह अपनी यात्रा का विवरण और संपर्क नंबर ट्रायल कोर्ट व जांच अधिकारी को पहले से उपलब्ध कराएँ।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने निर्देश दिया कि अंसारी यह सुनिश्चित करें कि उनके मुकदमों की सुनवाई में देरी न हो और वह मामलों के त्वरित निपटारे में सहयोग करें।

“याचिकाकर्ता को उत्तर प्रदेश राज्य से बाहर जाने की अनुमति दी जाती है, बशर्ते वह यात्रा स्थल का विवरण और संपर्क नंबर ट्रायल कोर्ट व जांच अधिकारी को दे और यह भी सुनिश्चित करे कि सुनवाई की प्रक्रिया बाधित या विलंबित न हो,” अदालत ने कहा।

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले लगाई गई रोक—जिसमें अंसारी को लंबित मामलों पर सार्वजनिक टिप्पणी से रोका गया था—उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने के लिए नहीं थी, बल्कि न्यायपालिका को सोशल मीडिया हमलों से बचाने के लिए थी।

“यह शर्त उन्हें चुप कराने के लिए नहीं है, बल्कि अदालतों को सोशल मीडिया हमलों से बचाने के लिए है। एक जनप्रतिनिधि के रूप में वह हमेशा लोगों के कल्याण, अर्थव्यवस्था और विकास से जुड़े मुद्दों पर बोल सकते हैं,” जस्टिस सूर्यकांत ने कहा।

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अंसारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अधिवक्ता निज़ाम पाशा पेश हुए, जबकि उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने दलील दी। नटराज ने बताया कि गैंगस्टर एक्ट मामले में ट्रायल जारी है और अदालत आवश्यक निर्देश देकर याचिका का निस्तारण कर सकती है।

शीर्ष अदालत ने 7 मार्च, 2024 को अंसारी को छह सप्ताह की अंतरिम जमानत दी थी, जिसमें कई सख्त शर्तें लगाई गई थीं। इसमें यूपी से बाहर जाने पर रोक और मऊ विधानसभा क्षेत्र में प्रवास के दौरान राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होने पर पाबंदी शामिल थी। 16 मई को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में संशोधन कर उन्हें अपने गाज़ीपुर स्थित घर में ठहरने की अनुमति दी थी।

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शुक्रवार का आदेश इन शर्तों में और ढील प्रदान करता है, जिससे उन्हें राज्य से बाहर आने-जाने की व्यापक स्वतंत्रता मिली है, हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि मुकदमों की सुनवाई में सहयोग अनिवार्य रहेगा।

6 सितंबर, 2024 को अंसारी को यूपी गैंगस्टर एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले 31 अगस्त, 2024 को चित्रकूट जिले के कोतवाली करवी थाने में उनके और अन्य चार व्यक्तियों—नवनीत सचान, नियाज़ अंसारी, फ़राज़ खान और शहबाज़ आलम खान—के खिलाफ रंगदारी और मारपीट का मामला दर्ज हुआ था। अंसारी को इससे पहले 4 नवंबर, 2022 को अन्य आपराधिक मामलों में हिरासत में लिया गया था।

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सुप्रीम कोर्ट का ताज़ा आदेश अब्बास अंसारी को बड़ी राहत देता है, लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित करता है कि वह मुकदमों की प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग करें और न्यायिक कार्यवाही में कोई बाधा न आए।

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